Shankaracharya Avimukteshwaranand: ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच चल रही तनातनी फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। गोकशी और गो-वंश सुरक्षा के मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। इस विवाद ने अब राजनीतिक के साथ-साथ सामाजिक और धार्मिक रंग भी ले लिया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
पशुपालन मंत्री के बयान पर उठे सवाल
हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने दावा किया था कि प्रदेश में गो-वंश पूरी तरह सुरक्षित है और गोकशी की घटनाएं केवल भ्रम और असत्य हैं। मंत्री के इस बयान के बाद सरकार ने गो-रक्षा के अपने प्रयासों को प्रभावी बताते हुए स्थिति को नियंत्रण में होने का भरोसा दिलाया था। हालांकि, इस दावे को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
शंकराचार्य का मुख्यमंत्री को पत्र
पशुपालन मंत्री के बयान को चुनौती देते हुए ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र लिखा है। अपने पत्र में शंकराचार्य ने सरकार के दावों को धरातल पर परखने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यदि शासन अपने कथनों को लेकर आश्वस्त है, तो स्वतंत्र जांच से पीछे नहीं हटना चाहिए।
स्वतंत्र जांच और प्रमाण संकलन की मांग
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि ज्योतिष्पीठ के प्रतिनिधियों को स्वतंत्र जांच और प्रमाण संकलन की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि इससे वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और यह तय हो जाएगा कि गोकशी की घटनाएं वास्तव में हो रही हैं या नहीं। उन्होंने इस प्रक्रिया को पारदर्शिता की दिशा में जरूरी कदम बताया है।
वैज्ञानिक परीक्षण से नहीं होनी चाहिए हिचक
शंकराचार्य ने अपने संदेश में साफ शब्दों में कहा है कि यदि सरकार का विश्वास अडिग और सच्चा है, तो उसे वैज्ञानिक परीक्षण और निष्पक्ष जांच से कोई संकोच नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि अनुमति देने में देरी होती है या जांच से इनकार किया जाता है, तो इसे पशुपालन मंत्री के बयान को छिपाने का प्रयास माना जाएगा।
गो-वंश रक्षा कागजों तक सीमित न हो
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि गो-वंश की रक्षा केवल सरकारी आंकड़ों और फाइलों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देनी चाहिए। यदि शासन सहयोग करता है, तो सच्चाई सामने आने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि सच और झूठ का फैसला केवल वास्तविक परिस्थितियों को देखकर ही किया जा सकता है।
पहले से जारी है टकराव का सिलसिला
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब शंकराचार्य और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच विवाद सामने आया हो। इससे पहले प्रयागराज माघ मेले में स्नान व्यवस्था को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। उस विवाद के बाद से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार शंकराचार्य के निशाने पर रहे हैं।
हिंदुत्व को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल
हाल ही में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हिंदू होने का प्रमाण मांगकर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया था। अब गोकशी के मुद्दे पर उठाया गया यह कदम एक बार फिर सरकार और शंकराचार्य के बीच टकराव को और गहरा करता नजर आ रहा है। आने वाले समय में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।










