Setback For Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी और अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उस समय गहरा झटका लगा जब पार्टी के 20 सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने का निर्णय लिया। इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र लिखकर एनडीए में शामिल होने की अपनी इच्छा व्यक्त की है।
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काकोली दस्तीदार
इस पूरी घटनाक्रम का नेतृत्व कर रही सांसद काकोली दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ 20 सांसद एकजुट हैं और वे सभी एनडीए को अपना समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। काकोली दस्तीदार ने स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल में आए हालिया चुनावी नतीजों के बाद, उन्हें यह महसूस हुआ है कि उनका राजनीतिक भविष्य एनडीए के साथ कहीं अधिक सुरक्षित और विकासोन्मुख है। उन्होंने संकेत दिया कि टीएमसी के भीतर जारी असंतोष और राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने यह कड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है।
शुभेंदु अधिकारी से बढ़ती नजदीकियां
सांसदों के इस बागी रुख के पीछे पिछले कुछ समय से चल रही हलचल प्रमुख रही है। पार्टी के भीतर टूट की अटकलों के बीच, सुखेंदु रॉय और काकोली दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 16 सांसदों ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी थी, क्योंकि शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के सबसे मुखर विरोधी माने जाते हैं। अब, लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में इन सांसदों ने सदन के भीतर भी अलग बैठने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है, जो सीधे तौर पर टीएमसी से उनके अलगाव का संकेत है।
सूची में शामिल हैं कई दिग्गज नाम
लोकसभा स्पीकर को सौंपे गए पत्र और शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने वाले सांसदों की सूची में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं। इनमें काकोली दस्तीदार, पार्थ भौमिक, जगदीश बसुनिया, अभिनेता से राजनेता बने देव, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, कालिपदा सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, असित मल, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रसुन बनर्जी, प्रतिमा मोंडल और बापा हलीदार जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। इन नेताओं का एनडीए की ओर जाना टीएमसी के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है, क्योंकि ये सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं।
क्या अब बंगाल में ढह जाएगा ममता का किला?
ममता बनर्जी के लिए यह विद्रोह सिर्फ एक संख्या बल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनकी नेतृत्व शैली और पार्टी की आंतरिक एकता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि इतने बड़े पैमाने पर सांसद पार्टी छोड़कर एनडीए में शामिल होते हैं, तो आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की विधानसभा और लोकसभा की राजनीति में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
फिलहाल, टीएमसी की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि लोकसभा स्पीकर इन सांसदों की अलग बैठने की मांग को स्वीकार कर लेते हैं, तो यह ममता बनर्जी सरकार के लिए केंद्र में एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है। बंगाल की राजनीति अब एक नए और चुनौतीपूर्ण मोड़ पर खड़ी है।
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