Satluj Review: ‘सतलुज’ में दिखा पंजाब का दर्द, दिलजीत दोसांझ ने जीता दर्शकों का दिल

दिलजीत दोसांझ और अर्जुन रामपाल स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ ओटीटी पर रिलीज हो गई है।

Satluj Review

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 4, 2026

Satluj Review: विवादों के घेरे में रही दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘पंजाब 95’, जिसे अब ‘सतलुज’ (Satluj) के नाम से ZEE5 पर रिलीज किया गया है, एक ऐसी सिनेमाई कृति है जो न केवल आपका दिल चीर देगी, बल्कि आपको झकझोर कर रख देगी। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास के उस काले अध्याय का आईना है जिसे लंबे समय तक पर्दे के पीछे रखने की कोशिश की गई थी।

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पंजाब के 1995 का खौफनाक सच

फिल्म की कहानी 1995 के उस पंजाब पर आधारित है, जब आतंक के खात्मे के नाम पर राज्य में मानवीय अधिकारों की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। कहानी जसवंत सिंह के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पेशे से एक बैंक कर्मचारी हैं। जब उनका एक करीबी रिश्तेदार रहस्यमय तरीके से गायब हो जाता है, तो जसवंत सिंह की तलाश उन्हें उस सच्चाई तक ले जाती है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली है। पता चलता है कि पुलिस ‘आतंकवाद’ खत्म करने की आड़ में हजारों बेगुनाहों को मौत के घाट उतार रही है। जब जसवंत सिंह इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो वे एक ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर शुरू होता है जुल्म और न्याय के बीच का एक लंबा संघर्ष।

निर्देशन और अभिनय

निर्देशक हनी त्रेहान ने इस फिल्म को जिस संवेदनशीलता और बारीकी से बनाया है, वह काबिले तारीफ है। फिल्म के संवाद और सीन इतने प्रभावशाली हैं कि आप 2 घंटे 45 मिनट की इस अवधि में एक पल के लिए भी खुद को स्क्रीन से अलग नहीं कर पाएंगे। विशेष रूप से पुलिस के अत्याचारों को दिखाने वाले दृश्य रोंगटे खड़े कर देते हैं।

अभिनय के मोर्चे पर, दिलजीत दोसांझ ने अपने करियर का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। जसवंत सिंह के किरदार में उनकी सादगी, पीड़ा और संघर्ष को उन्होंने जिस गहराई के साथ निभाया है, वह शब्दों से परे है। उनके टॉर्चर वाले दृश्य दर्शकों को अंदर तक परेशान कर देंगे। वहीं, सुविंदर विक्की ने एक क्रूर पुलिस अधिकारी के रूप में इतना सटीक अभिनय किया है कि दर्शक उन पर गुस्सा करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। अर्जुन रामपाल ने सीबीआई अधिकारी के रूप में और गीतिका विद्या ओहलयान ने पत्नी की भूमिका में जान फूंक दी है।

क्यों देखनी चाहिए यह फिल्म?

‘सतलुज’ की पटकथा (नीरेन भट्ट, हनी त्रेहान और मैत्रय उत्सव द्वारा लिखित) अत्यंत गहन शोध का परिणाम है। फिल्म की सेटिंग, बैकग्राउंड स्कोर और संगीत का चयन आपको सीधे 1995 के उस दर्दनाक दौर में ले जाता है। यह फिल्म उन लोगों की आवाज है जो उस समय के अन्याय के नीचे दब गए थे। यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं है, बल्कि उस दर्द का दस्तावेजीकरण है जिसे पंजाब के लोगों ने भोगा है।

रेटिंग: 4/5 स्टार्स

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