Sanjay Raut News: महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर सियासी चर्चा तेज है। डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद इस विषय ने राजनीतिक गलियारों में नई गर्मी ला दी है। शरद पवार गुट के नेताओं का दावा है कि विलय पर बातचीत अंतिम चरण में थी, जबकि अजित पवार गुट के नेता इन दावों को खारिज कर रहे हैं। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि यह पूरी तरह से एनसीपी का आंतरिक मामला है।
Ajit Pawar: अजित पवार की मौत पर संजय राउत का बड़ा बयान, BJP को घेरा
संजय राउत का बयान
आपको बता दें कि, गुरुवार, 5 फरवरी को मुंबई में मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने एनसीपी के विलय की अटकलों पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि अगर यह एनसीपी की समस्या है, तो उन्हें इसका समाधान खुद ही निकालना चाहिए। राउत ने यह भी कहा कि यह देखना दिलचस्प है कि एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे शरद पवार को सलाह दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनसीपी के दोनों गुटों के बीच चल रही चर्चाओं से शिवसेना का कोई लेना-देना नहीं है। उनका फोकस ‘इंडिया’ अलायंस और महाविकास अघाड़ी पर ही केंद्रित है। संजय राउत ने कहा, “जिन नेताओं को शरद पवार राजनीति में लाए, जिन्हें पद, प्रतिष्ठा और ताकत दी गई, वही अब उन्हें सलाह दे रहे हैं। लेकिन यह पूरी तरह से उनके आंतरिक मामलों में आता है और इस पर बाहरी हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।”
अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक हालात
बताते चलें कि, 28 जनवरी, 2026 को बारामती में हुए विमान हादसे में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी अध्यक्ष अजित पवार का निधन हो गया। इस दुर्घटना ने पार्टी और राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। हादसे के तीन दिन बाद, 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली और पार्टी के विधायक दल की नेता के रूप में चुनी गई।
एनसीपी अध्यक्ष पद को लेकर भी पार्टी में मंथन जारी है। शरद पवार और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच इस विषय पर चल रही चर्चाओं ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलें बढ़ा दी हैं। इस बीच, संजय राउत ने साफ कर दिया कि शिवसेना इन आंतरिक मामलों में शामिल नहीं होगी और उनका ध्यान गठबंधन और राज्य में सत्ताधारी दल के समीकरणों पर केंद्रित रहेगा।
Ajit Pawar Funeral: अजित पवार की अंतिम विदाई में बड़ी चोरी, चोरों ने 30 लाख के गहने उड़ाए
राजनीतिक और भविष्य की संभावनाएं
एनसीपी के दोनों गुटों का विलय यदि होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई दिशा बन सकती है। हालांकि, संजय राउत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि अन्य पार्टियों को इस प्रक्रिया में दखल देने से बचना चाहिए। एनसीपी के गुटों के बीच संतुलन और नेतृत्व की जटिलताओं को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि विलय कब तक संभव होगा।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस विलय की प्रक्रिया में पारिवारिक और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ पार्टी की रणनीतिक स्थिरता को भी ध्यान में रखा जाएगा। वहीं शिवसेना और महाविकास अघाड़ी गठबंधन की राजनीतिक दिशा पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनका फोकस गठबंधन को मजबूत करना और आगामी चुनावों की तैयारी करना है।
Ajit Pawar Death: अजित पवार चाहते थे NCP के दोनों गुटों का विलय, करीबी ने खोला राज










