संजय राउत का दावा—मराठी वोट बैंक के चलते बीजेपी को झुकना पड़ा, रितु तावड़े बनीं मुंबई मेयर

नई दिल्ली शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में उनकी पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को मिले मराठी लोगों के भारी समर्थन के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुंबई के महापौर के रूप में एक मराठी व्यक्ति को चुनना पड़ा। राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कटाक्ष किया। शनिवार को आरएसएस शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान को संघ प्रमुख मोहन भगवत से बातचीत करते देखा गया था। राज्यसभा सदस्य ने पूछा, "क्या

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फ़रवरी 8, 2026

नई दिल्ली
शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) नेता संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव में उनकी पार्टी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को मिले मराठी लोगों के भारी समर्थन के कारण भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुंबई के महापौर के रूप में एक मराठी व्यक्ति को चुनना पड़ा।

राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी कटाक्ष किया। शनिवार को आरएसएस शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में अभिनेता सलमान खान को संघ प्रमुख मोहन भगवत से बातचीत करते देखा गया था। राज्यसभा सदस्य ने पूछा, "क्या यह फिल्म अभिनेता सलमान खान का स्वागत था या (यह संदेश था कि) संघ व उसकी शाखाओं में मुसलमानों का भी स्वागत है?" उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि जिस तरह से हिंदू-मुस्लिम नफरत और बदले की भावना से प्रेरित दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, उसमें संघ भी शामिल है।

राउत ने मुंबई के महापौर पद के लिए भाजपा द्वारा रितु तावडे (53) को उम्मीदवार बनाए जाने पर कहा कि वह मूल रूप से कांग्रेस से हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं है। राज्यसभा सदस्य ने कहा, "जिस तरह से मराठी लोगों ने भारी बहुमत से शिवसेना (उबाठा) और मनसे को वोट दिया, भाजपा को मुंबई में एक मराठी महापौर बनाना ही पड़ा।" रितु तावडे, मुंबई की महापौर बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और शिवसेना (उबाठा) द्वारा किसी प्रतिद्वंद्वी को मैदान में नहीं उतारने के फैसले के बाद चार दशकों में सत्तारूढ़ पार्टी की वह पहली महापौर बनेंगी। रितु के निर्विरोध चुने जाने से ठाकरे परिवार का बीएमसी पर 25 साल का वर्चस्व समाप्त हो गया।

 

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