UP Politics: ‘हमें राशन नहीं, शासन चाहिए’, संजय निषाद के बयान से यूपी की सियासत गरम

UP Politics: दिल्ली में निषाद पार्टी के संवैधानिक सुरक्षा अधिकार महासम्मेलन में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने मछुआरा समाज के आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को साफ संदेश देते हुए कहा कि मछुआरों को आरक्षण देना ही पड़ेगा। संजय निषाद के इस बयान को आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब उनका समाज केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों का ठोस समाधान चाहता है। BJP को चेतावनी, आरक्षण नहीं मिला तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा बताते चले

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 21, 2026

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UP Politics: दिल्ली में निषाद पार्टी के संवैधानिक सुरक्षा अधिकार महासम्मेलन में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने मछुआरा समाज के आरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को साफ संदेश देते हुए कहा कि मछुआरों को आरक्षण देना ही पड़ेगा। संजय निषाद के इस बयान को आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब उनका समाज केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों का ठोस समाधान चाहता है।

BJP को चेतावनी, आरक्षण नहीं मिला तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा

बताते चले कि, महासम्मेलन को संबोधित करते हुए संजय निषाद ने कहा कि निषाद पार्टी ने 2013 से 2026 तक लंबा राजनीतिक सफर तय किया है और अब समाज अपने हक के लिए पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “अब हम सिर्फ नाव नहीं, चुनाव लड़ने वाले हैं। मछुआरों को आरक्षण देना ही पड़ेगा, बीजेपी भी समझ ले।”

BJP को चेतावनी, आरक्षण नहीं मिला तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा

उन्होंने आगे कहा कि जिस किसी ने भी निषाद समाज के साथ धोखा किया है, उसे इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है। संजय निषाद ने बीजेपी से आरक्षण की मांग पूरी करने की अपील करते हुए साफ कर दिया कि उनका समाज अपने अधिकारों को लेकर गंभीर है। उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

निषाद समाज के वोट पर सभी दलों की नजर

संजय निषाद ने कहा कि आज गांव-गांव में निषाद पार्टी का झंडा दिखाई दे रहा है और अब सभी राजनीतिक दल निषाद समाज की बात कर रहे हैं। उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस भी निषाद समाज को टिकट देने की बात करती हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि निषाद पार्टी की सबसे बड़ी प्राथमिकता मछुआरा समाज को आरक्षण दिलाना है। उनके मुताबिक, केवल चुनाव में प्रतिनिधित्व देने की बात करना काफी नहीं है, बल्कि समाज को उसके संवैधानिक अधिकार भी मिलने चाहिए।

आरक्षण के बिना गठबंधन नहीं, अपने दम पर आगे बढ़ेगी पार्टी

आरक्षण के बिना गठबंधन नहीं, अपने दम पर आगे बढ़ेगी पार्टी

बीजेपी और समाजवादी पार्टी समेत दूसरे दलों के साथ राजनीतिक समीकरणों पर संजय निषाद ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कई राजनीतिक दल निषाद पार्टी को साथ लेकर चलना चाहते हैं, लेकिन गठबंधन या समर्थन पर बातचीत आरक्षण के मुद्दे को लेकर ही होगी। उन्होंने कहा कि आरक्षण के बिना किसी भी राजनीतिक समझौते पर बात नहीं होगी। इस बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी आगामी चुनावों में आरक्षण के मुद्दे को अपनी राजनीति के केंद्र में रखना चाहती है। हालांकि, उन्होंने किसी गठबंधन के बारे में अंतिम फैसला घोषित नहीं किया।

‘जय निषादराज’ का नारा, दिल्ली तक आंदोलन की चेतावनी

संजय निषाद ने अपने संबोधन में कहा, “जय भीम वालों ने आरक्षण लागू करवा लिया, अब जय निषादराज वाले भी अपना हक लेकर रहेंगे। दिल्ली दूर नहीं है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल महासम्मेलन में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पहुंचे हैं, लेकिन अगर पूरा समाज अपने अधिकारों के लिए दिल्ली की ओर कूच कर दे, तो स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके इस बयान को आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

‘हमें राशन नहीं, शासन चाहिए’, सत्ता में भागीदारी की मांग

महासम्मेलन में संजय निषाद ने कहा कि निषाद समाज को केवल सरकारी योजनाओं और राशन तक सीमित नहीं रखा जा सकता। समाज को शासन और सत्ता में भी उचित भागीदारी मिलनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने नारा दिया, “आरक्षण मिले तो शांति, नहीं तो होगी क्रांति।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से समाज के अधिकारों के लिए एकजुट रहने और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। साथ ही समाज की बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। महासम्मेलन में मछुआरा समाज के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण की मांग प्रमुखता से सामने आई। अब देखना होगा कि इस मांग पर सरकार और संबंधित राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं।