S Jaishankar Statement: भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- रिश्ते अच्छे हों, लेकिन…

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि दुनिया किसी भी देश को तभी गंभीरता से लेती है जब वह अपनी सुरक्षा के लिए कड़ा जवाब देता है, जैसा कि भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' और 'बालाकोट एयरस्ट्राइक' के जरिए साबित कर दिखाया है।

S Jaishankar Statement

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 22, 2026

S Jaishankar Statement: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर देश की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ हमेशा से अच्छे और बेहतर संबंध स्थापित करना चाहता है, लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि भारत सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को नजरअंदाज कर देगा। आतंकवाद के मुद्दे पर देश किसी भी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। हाल ही में आयोजित ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट’ कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री ने दुनिया के सामने भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को पूरी बेबाकी से रखा।

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दुनिया तभी लेती है गंभीरता जब देश खुद देता है कड़ा जवाब

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भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जयशंकर का बड़ा बयान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक मंचों पर कोई भी देश तभी आपको गंभीरता से लेता है जब आप खुद अपनी सुरक्षा के लिए खड़े होते हैं और करारा जवाब देते हैं।

भारत ने अतीत में ऑपरेशन सिंदूर और बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसी सैन्य कार्रवाइयों के जरिए यह साबित कर दिखाया है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। जयशंकर ने दो टूक अंदाज में कहा कि अब भारत इस बात का लंबा इंतजार बिल्कुल नहीं करेगा कि अमेरिका या दुनिया का कोई अन्य देश आतंकवाद को लेकर हमारी चिंताओं और दर्दों को पूरी तरह समझे।

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भारत-पाकिस्तान संबंधों पर जयशंकर का बड़ा बयान

कार्यक्रम के दौरान जब विदेश मंत्री से यह सवाल पूछा गया कि क्या पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को अपने पाले में करने में सफल रहा है? और क्या इसी वजह से वॉशिंगटन भारत की आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं को पूरी गहराई से नहीं समझ पा रहा है? क्या इसका असर भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा?

इन सवालों के जवाब में एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा इससे कहीं ज्यादा व्यापक और गंभीर है। यह केवल वॉशिंगटन के समझ पाने या न पाने का नहीं है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि यदि वॉशिंगटन आतंकवाद के इस दर्द और खतरे को इतनी ही अच्छी तरह समझता था, तो 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11) के बाद उसने खुद कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की थी?

उन्होंने याद दिलाया कि जब भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा पलटवार किया, तब देश ने यह बिल्कुल नहीं सोचा कि वॉशिंगटन हमारी इस कार्रवाई को समझेगा या नहीं। भारत ने वह कदम इसलिए उठाया क्योंकि भारत खुद इस समस्या की गंभीरता को अच्छी तरह समझता था।

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा व ऊर्जा सहयोग पर हुई उच्चस्तरीय चर्चा

एक तरफ जहां कूटनीतिक मंचों पर बेबाक बयान सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत और अमेरिका के आपसी कूटनीतिक संबंध भी लगातार आगे बढ़ रहे हैं। इससे पहले भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा तथा रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ाने को लेकर अहम चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच यह महत्वपूर्ण बैठक मुंबई में संपन्न हुई। खास बात यह है कि पिछले पांच महीनों के भीतर अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दूसरा भारत दौरा है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते कूटनीतिक समीकरणों को दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए एस. जयशंकर ने बताया कि उन्होंने और अमेरिकी विदेश मंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को लेकर अपने विचार साझा किए। इस दौरान रक्षा, ऊर्जा, आधुनिक तकनीक, व्यापार और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों सहित कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। अमेरिकी पक्ष ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत के साथ बढ़ता ऊर्जा व्यापार देश की आपूर्ति शृंखलाओं (Supply Chains) में विविधता लाने में एक परिवर्तनकारी और बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिससे भारत की विशाल उपभोक्ता मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

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