Israel Iran War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच भारत सरकार ने संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बयान देते हुए कहा कि सरकार क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रधानमंत्री स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
छोटा निवेश, बड़ा फायदा! पोस्ट ऑफिस स्कीम से मिलेगा ₹90 हजार तक ब्याज
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और भारत की कूटनीतिक पहल
बताते चले कि, विदेश मंत्री ने सदन को जानकारी दी कि इस मौजूदा संकट की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस जटिल स्थिति का समाधान केवल डिप्लोमेसी (Diplomacy) और बातचीत के माध्यम से ही संभव है। भारत शुरू से ही सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है ताकि हिंसा को और बढ़ने से रोका जा सके। सरकार का मानना है कि कूटनीतिक प्रयासों से ही इस क्षेत्र में शांति बहाल की जा सकती है।
खाड़ी देशों में भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और सरकार की प्राथमिकता
एस. जयशंकर ने बताया कि पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। इसके अलावा, ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और पेशेवर मौजूद हैं। सरकार इन सभी की सुरक्षा को लेकर संबंधित मंत्रालयों के साथ निरंतर संपर्क में है। जयशंकर के अनुसार, “हमारी प्राथमिकता वहां मौजूद अपने नागरिकों की रक्षा करना और किसी भी आपात स्थिति के लिए प्रभावी जवाब तैयार रखना है।”
ग्लोबल सप्लाई चेन और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाला प्रभाव
विदेश मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यह इलाका भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। खाड़ी देश भारत के लिए तेल और गैस के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। इस क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और सप्लाई चेन में आने वाली संभावित रुकावटें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकती हैं। भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इन रास्तों और देशों में शांति की अत्यंत आवश्यकता है।
संसद में विपक्ष का शोर-शराबा
जब विदेश मंत्री राज्यसभा में सरकार का पक्ष रख रहे थे, उसी दौरान विपक्षी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। शोर-शराबे के बीच भी जयशंकर ने अपना संबोधन जारी रखा और स्पष्ट किया कि भारत एक जिम्मेदार पड़ोसी होने के नाते क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने 20 फरवरी को जारी सरकारी बयान का हवाला देते हुए दोहराया कि तनाव कम करने के लिए सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए।
Stocks to Watch: कच्चे तेल की कीमतों से मार्केट में उठापटक, इन स्टॉक्स से कर सकते हैं मुनाफा










