Russia-Ukraine War : रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के बीच एक बेहद अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कथित तौर पर रूसी सेना को राजधानी कीव पर अगले 72 घंटों तक किसी भी तरह के हमले न करने का सख्त आदेश दिया है। यह बड़ा फैसला ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आया है जब अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए जारी कूटनीतिक कोशिशों के तहत मॉस्को पहुंच चुके हैं। रूसी राष्ट्रपति और अमेरिकी दूतों के बीच होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक को संघर्ष विराम की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अमेरिकी विशेष प्रतिनिधियों के साथ बैठक
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव के हवाले से जानकारी दी है कि राष्ट्रपति पुतिन अमेरिकी प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के साथ औपचारिक चर्चा करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य एजेंडा रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं तलाशना और आगे की शांति वार्ताओं की रूपरेखा तैयार करना है। क्रेमलिन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि दोनों पक्षों के बीच यह उच्च स्तरीय संवाद पूरा होने के बाद मीडिया को इससे जुड़ी आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी।
बातचीत के माहौल को अनुकूल बनाने की कोशिश
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, क्रेमलिन ने इस बात की पुष्टि की है कि पुतिन द्वारा कीव पर 72 घंटे तक हमले रोकने का यह आदेश अमेरिकी दूतों की मॉस्को यात्रा के ठीक बीच आया है। जानकारों का मानना है कि इस अस्थायी युद्धविराम जैसे कदम का उद्देश्य कूटनीतिक बातचीत के लिए एक अनुकूल और शांतिपूर्ण माहौल तैयार करना है। हालांकि, इस अल्पकालिक रोक की जमीनी शर्तें क्या होंगी और इसका वास्तविक कूटनीतिक प्रभाव कितना गहरा होगा, इसको लेकर विस्तृत और स्पष्ट विवरण अभी सामने आना बाकी है।
मॉस्को पहुंचे अमेरिकी दूत विटकॉफ और कुशनर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत के तौर पर स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शनिवार को मॉस्को पहुंचे। उनका यह दौरा रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी खूनी संघर्ष को कूटनीतिक तरीके से खत्म करने के प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से हो रहा है। चूंकि यह युद्ध अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके समाधान के लिए लगातार गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रतिनिधियों की रूस यात्रा को इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
रूसी अधिकारी किरिल दिमित्रिएव ने किया स्वागत
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब अमेरिकी प्रतिनिधि मॉस्को पहुंचे तो रूसी राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि किरिल दिमित्रिएव ने हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। इस पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दिमित्रिएव ने हवाई अड्डे पर विटकॉफ और कुशनर का स्वागत किया, जिसके बाद तीनों का आधिकारिक काफिला सरकारी हवाई अड्डे से सीधे शहर के लिए रवाना हो गया। कूटनीतिक हलकों में दिमित्रिएव की इस सक्रियता को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की एक अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
शांति प्रयासों में दिमित्रिएव की पुरानी भूमिका
किरिल दिमित्रिएव इससे पहले भी रूस और अमेरिका के बीच बैक-चैनल कूटनीति और महत्वपूर्ण वार्ताओं में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। वह पुतिन और अमेरिकी वार्ताकारों के बीच हुई पूर्व की कई बैठकों का भी हिस्सा रहे हैं। अमेरिकी दूतों के इस ताजा दौरे के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच सुचारू संपर्क बनाए रखने में उनकी मौजूदगी इस पूरी प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाती है।
वैश्विक स्तर पर टिकी हैं दुनिया की निगाहें
रूस-यूक्रेन युद्ध के भयावह मानवीय, आर्थिक और रणनीतिक परिणामों को देखते हुए पूरी दुनिया की निगाहें इस शांति प्रयास पर टिकी हुई हैं। अमेरिका के विशेष दूतों की यह मॉस्को यात्रा दोनों पक्षों के बीच किसी नए और स्थायी समाधान की शुरुआत कर सकती है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि लंबी अवधि के युद्धविराम और क्षेत्रीय विवादों के हल के लिए कौन-से मुद्दों पर सहमति बन पाती है।
बैठक के परिणामों पर निर्भर होगी अगली रणनीति
क्रेमलिन के संकेतों के मुताबिक, पुतिन और अमेरिकी दूतों की इस गुप्त और अहम बैठक के बाद ही अगली कूटनीतिक रणनीति स्पष्ट हो सकेगी। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या 72 घंटे की यह आंशिक हमले रोकने की अवधि आगे बढ़ाई जाएगी और क्या इससे रूस तथा यूक्रेन के बीच एक व्यापक और स्थायी युद्धविराम की राह प्रशस्त होगी। फिलहाल मॉस्को में चल रही यह उच्च स्तरीय हलचल आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।










