
Russia Job Scam : विदेश में नौकरी और बेहतर कमाई की उम्मीद लेकर रूस पहुंचे बांग्लादेश के कई लोगों के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि निर्माण क्षेत्र में काम दिलाने का वादा करके उन्हें रूस बुलाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, केवल 21 दिन का प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें रूस-यूक्रेन युद्ध के मैदान में तैनात कर दिया गया। इस मामले में कम से कम 20 बांग्लादेशी नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है।
तीन संस्थानों पर नौकरी के नाम पर ठगी का आरोप
जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों से करीब 30 लोगों को रूस में रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। आरोप है कि जाबाले नूर, आरएस इंटरनेशनल और टीएस ग्रुप नामक संस्थानों ने प्रत्येक व्यक्ति से लगभग 10 लाख रुपये लिए। उन्हें निर्माण क्षेत्र में नौकरी देने की बात कही गई थी। हालांकि, रूस पहुंचने के बाद उनके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी हुई और उन्हें बताए गए काम के बजाय सैन्य गतिविधियों में लगा दिया गया।

पासपोर्ट और मोबाइल फोन लेने का आरोप
पीड़ितों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, रूस पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और पासपोर्ट कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिए गए। इसके बाद उन्हें केवल 21 दिनों का प्रशिक्षण देकर युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन बांग्लादेशी नागरिकों का इस्तेमाल विरोधी सेना की स्थिति का पता लगाने के लिए जोखिम भरे अभियानों में किया जाता था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
ड्रोन हमले में पहले दिन 17 लोगों की मौत
बांग्लादेश की स्पेशल रिस्पॉन्स बटालियन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इन लोगों को युद्ध क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में तैनात किया गया था। एसआरबी-10 बटालियन के कमांडर और अतिरिक्त उपमहानिरीक्षक मोहम्मद असदुज्जमान के हवाले से बताया गया कि पहले ही दिन ड्रोन हमले में 17 लोगों की मौत हो गई। बाद में अलग-अलग समय पर तीन अन्य लोगों की मौत की जानकारी मिली। इस तरह करीब 30 लोगों के समूह में 20 की मौत की प्रारंभिक पुष्टि होने की बात कही गई है। दो घायल नागरिकों के बांग्लादेश लौटने की खबर भी सामने आई है।

गिरफ्तारी के बाद जांच तेज, लोगों को सतर्क रहने की सलाह
बताया गया है कि जाबाले नूर इंटरनेशनल के संस्थापक मिजानुर रहमान और अबू ताहेर उर्फ लेंटू को गिरफ्तार किया गया है। इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी होने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों की जांच में आगे और तथ्य सामने आ सकते हैं। इस घटना ने विदेश में रोजगार दिलाने वाले एजेंटों और संस्थानों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। नौकरी के लिए विदेश जाने से पहले कंपनी, वीजा, अनुबंध और भर्ती एजेंसी की वैधता की जांच करना जरूरी है।
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