Rupee Vs Dollar: सोमवार, 1 जून 2026 को भारतीय रुपया विदेशी मुद्रा बाजार में मामूली बढ़त के साथ खुला। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे की मजबूती के साथ 94.97 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.00 पर बंद हुआ था। हालांकि रुपये में यह सुधार उस समय हुआ है जब कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी की निकासी (Outflow) का दबाव भारतीय बाजार की धारणा पर असर डाल रहा है।
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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव
एशियाई मुद्राओं पर वैश्विक दबाव के बीच भारतीय रुपये का प्रदर्शन संभला हुआ है। इसका मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आई 2.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है, जो अब 93.4 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाई के बढ़ने की खबरों ने बाजार को चिंता में डाल दिया है, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार के संभावित सीज़फ़ायर समझौते की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं। कच्चे तेल की यह तेजी न केवल भारत, बल्कि अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जिसमें दक्षिण कोरियाई वॉन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।
बाजार की धारणा पर दबाव के प्रमुख कारण
बाजार के जानकारों का मानना है कि रुपये पर आने वाले समय में कई मोर्चों से दबाव बना रह सकता है। इसके प्रमुख कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
FPI आउटफ्लो: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का भारतीय बाजार से लगातार बाहर निकलना चिंता का विषय है। शुक्रवार के आंकड़ों के अनुसार, FPIs ने 2 अरब डॉलर से अधिक के भारतीय शेयर बेचे हैं।
कॉर्पोरेट डिमांड: नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड मार्केट में मैच्योरिटी और डॉलर की नियमित कॉर्पोरेट मांग रुपये को कमजोर करने का काम कर रही है।
इक्विटी एडजस्टमेंट: इक्विटी इंडेक्स से जुड़े बदलावों के कारण भी विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
आरबीआई की भूमिका और भविष्य की राह
इन चुनौतियों के बावजूद, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की सक्रियता रुपये को सहारा दे रही है। केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप के कारण ही रुपया मई के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 96.96 से उबरने में सफल रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के अंत में आरबीआई की ‘शॉर्ट फॉरवर्ड डॉलर कमिटमेंट्स’ घटकर 95.3 अरब डॉलर रह गई हैं, जो मार्च में 100 अरब डॉलर से अधिक थीं। वहीं, 22 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) घटकर 681 अरब डॉलर पर आ गया है, जो पिछले एक साल से अधिक समय का न्यूनतम स्तर है।
आईएफए ग्लोबल (IFA Global) के अनुसार, आरबीआई रुपये के लिए एक ‘मजबूत फ्लोर’ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रहा है। अनुमान है कि अगले 4 से 6 हफ्तों में USD/INR की जोड़ी 94.40 से 96.20 के दायरे में कारोबार कर सकती है। वर्तमान में, डॉलर इंडेक्स 99.05 पर बना हुआ है, जबकि 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 4.47 प्रतिशत के स्तर पर है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक स्तर पर होने वाली भू-राजनीतिक हलचल और आरबीआई के अगले कदमों पर टिकी है।
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