Road Accident Report: खराब सड़कें बन रहीं मौत का कारण, सरकार ने जारी किए चौंकाने वाले आंकड़े

सरकार की नई रोड एक्सीडेंट रिपोर्ट में खराब सड़कों को कई हादसों का प्रमुख कारण बताया गया है। जारी आंकड़ों ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब चर्चा इस बात की है कि किन क्षेत्रों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं हुईं और इन्हें रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

Road Accident Report

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 31, 2026

Road Accident Report:  देश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और हर दिन सैकड़ों परिवार इन हादसों की वजह से अपनों को खो रहे हैं। आमतौर पर सड़क दुर्घटनाओं के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही या नशे में वाहन चलाने को जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि खराब सड़कें और इंजीनियरिंग संबंधी कमियां भी बड़ी वजह बन रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों के व्यवहार पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सुरक्षित सड़क निर्माण और नियमित रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

खराब सड़कें भी बन रही हैं जानलेवा

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, देश में हर दिन औसतन करीब 80 लोगों की मौत सड़क की खराब स्थिति, अधूरे निर्माण, गड्ढों और सड़क डिजाइन की कमियों के कारण हो रही है। मंत्रालय का कहना है कि यदि सड़क निर्माण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए और समय-समय पर मरम्मत सुनिश्चित की जाए, तो बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि सुरक्षित बुनियादी ढांचा सड़क सुरक्षा का अहम हिस्सा है।

साल 2024 में लाखों सड़क हादसे दर्ज

‘रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2024’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में देशभर में 4.87 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 1.77 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क की खराब स्थिति और इंजीनियरिंग संबंधी खामियों के कारण हजारों दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए। सरकार का मानना है कि ब्लैक स्पॉट की पहचान और समय पर सुधार से दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।

हर साल बढ़ रहा सड़क हादसों का आंकड़ा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2021 में लगभग 4.12 लाख दुर्घटनाएं और 1.53 लाख मौतें दर्ज हुई थीं। इसके बाद 2022, 2023 और 2024 में भी दुर्घटनाओं और मृतकों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई। हाल के वर्षों के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में अभी भी व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

इन राज्यों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं

राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तमिलनाडु सबसे आगे रहा। इसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान का स्थान रहा। वहीं, सड़क हादसों में सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में दर्ज की गईं। इसके अलावा तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश भी उन राज्यों में शामिल रहे जहां सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई।

तेज रफ्तार बनी सबसे बड़ी वजह

रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क दुर्घटनाओं का सबसे प्रमुख कारण अब भी ओवरस्पीडिंग है। इसके अलावा गलत दिशा में वाहन चलाना, नशे की हालत में ड्राइविंग, रेड लाइट का उल्लंघन और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बने। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैफिक नियमों का पालन और सुरक्षित ड्राइविंग की आदतें सड़क हादसों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में पैदल यात्रियों की मौत के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पैदल यात्रियों से जुड़े हादसों की संख्या अधिक रही। यह स्थिति संकेत देती है कि सड़क डिजाइन और पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता है।

सरकार 4E रणनीति पर कर रही काम

सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर 6,358 ब्लैक कॉरिडोर की पहचान कर सुधार कार्य शुरू किया है। इन स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण, क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रोड मार्किंग और बेहतर रोशनी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके साथ ही सरकार 4E रणनीति—Education (शिक्षा), Engineering (इंजीनियरिंग), Enforcement (प्रवर्तन) और Emergency Care (आपातकालीन चिकित्सा)—पर भी काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करना, ट्रैफिक नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

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