किडनी फेल होने का खतरा! AIIMS के डॉक्टर ने बताया, कौन से टेस्ट और यूरिन का रंग जरूरी संकेत हैं

नई दिल्ली World Kidney Day:12 मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है और इस दिन लोगों को किडनी हेल्थ के लिए अवेयर किया जाता है. भारत में किडनी की बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भर में भारत दूसरे नंबर पर है जहां पर सबसे अधिक क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के मरीज हैं. भारत में किडनी की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है, 15 साल से ऊपर की आबादी में भी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की चपेट में आ रहे हैं. 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में

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Published On :

मार्च 12, 2026

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नई दिल्ली
World Kidney Day:12
मार्च को वर्ल्ड किडनी डे मनाया जाता है और इस दिन लोगों को किडनी हेल्थ के लिए अवेयर किया जाता है. भारत में किडनी की बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया भर में भारत दूसरे नंबर पर है जहां पर सबसे अधिक क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के मरीज हैं. भारत में किडनी की बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है, 15 साल से ऊपर की आबादी में भी क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) की चपेट में आ रहे हैं. 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में लगभग 17% आबादी किसी न किसी रूप में किडनी की समस्या से जूझ रही है. वर्ल्ड किडनी डे पर AIIMS भोपाल के डॉक्यर ने बताया है कि कैसे छोटी-छोटी गलतियां आपकी किडनी फेल कर सकती हैं।

यंगस्टर्स में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
AIIMS भोपाल के यूरोलॉजिस्ट और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. केतन मेहरा ने बताया, 'किडनी की समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है. मेरे पास ऐसे कई मरीज आते हैं जो 20 साल के आसपास के हैं या उससे भी कम हैं. ऐसे लोगों में किडनी खराब होने का एक बड़ा कारण 'ऑटो-इम्यून डिजीज' है जिसमें शरीर की इम्यूनिटी ही किडनी को नुकसान पहुंचाने लगती है. इसके अलावा, कई मामलों में कारण का पता नहीं चल पाता जिसे मेडिकल भाषा में 'क्रिप्टोजेनिक' कहते हैं. युवाओं में सिरदर्द, पैरों में सूजन और धुंधला दिखना जैसे लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है जो बाद में किडनी फेलियर के रूप में सामने आते हैं।

पेनकिलर्स बन रहे दुश्मन
डॉ. कहते हैं, 'आजकल सिरदर्द या शरीर में दर्द होने पर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाइयां खा लेते हैं. ऐसे में हैवी डोज वाली पेनकिलर्स किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाती हैं. हालांकि पैरासिटामोल को सुरक्षित माना जाता है लेकिन अन्य हेवी पेनकिलर्स का लगातार सेवन किडनी फेलियर का बड़ा कारण बन रहा है. बिना डॉक्टरी पर्चे के कोई भी दर्द निवारक दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है।

किडनी की सेहत के लिए जरूरी टेस्ट

हमारी किडनी 50% तक खराब होने पर भी खुद को कॉम्पेंसेट (एडजस्ट) कर लेती है, इसलिए लक्षण तब दिखते हैं जब नुकसान ज्यादा हो चुका होता ह इसलिए समय-समय पर जांच ही बचाव का एकमात्र रास्ता है।

डॉ. मेहरा ने बताया, 'अगर आपको ऊपर दिए गए लक्षण महसूस होते हैं तो तुरंत जांच करानी चाहिए. इसके अलावा समय-समय पर कुछ टेस्ट कराते रहें ताकि आपको अपनी किडनी की सेहत का पता चलता रहे।

KFT/RFT (किडनी फंक्शन टेस्ट): इसमें मुख्य रूप से सेरम यूरिया और सेरम क्रिएटिनिन की जांच की जाती है।

इलेक्ट्रोलाइट्स: ब्लड में सोडियम और पोटेशियम के लेवल की जांच।

यूरिन रूटीन: यूरिन में प्रोटीन या अन्य तत्वों की मौजूदगी देखने के लिए।

यूरिन भी बताती है किडनी खतरे में है

डॉ. मेहरा के अनुसार, 'किडनी शरीर के टॉक्सिन्स को बाहर निकालने का काम करती है. यूरिन का रंग और उसकी फ्रीक्वेंसी किडनी की सेहत का हाल बता देती है इसलिए सभी को अपनी यूरिन के कलर और फिक्वेंसी पर भी ध्यान देना चाहिए।

कम यूरिन आना: अगर आपको पहले की तुलना में कम पेशाब आ रहा है, तो यह किडनी के सही से काम न करने का संकेत है।

डार्क या कॉफी कलर: यदि यूरिन का रंग गहरा यानी कोला या ब्लैक कॉफी कलर का आ रहा है तो समझ लीजिए कि मामला गंभीर है।

झाग या सूजन: चेहरे और पैरों पर सूजन आना इस बात का संकेत है कि किडनी लिक्विड को शरीर से बाहर नहीं निकाल पा रही है और वह अंदर ही जमा हो रहा है।

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