धर्म सम्मेलनों से समाज में एकता और राष्ट्र सेवा की भावना को मिलेगा बल: दत्तात्रेय होसबोले

धर्मशाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने शनिवार को कहा कि पूरे देश में धर्म के सही अर्थ और कर्तव्यों के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को एकजुट करने के उद्देश्य से विभिन्न धर्म सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, "समाज में एकता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जो लोग आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा में लगे हुए हैं। वे इन सम्मेलनों में भाग लेकर राष्ट्र सेवा

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Published On :

मार्च 29, 2026

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धर्मशाला
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने शनिवार को कहा कि पूरे देश में धर्म के सही अर्थ और कर्तव्यों के बारे में जागरूकता फैलाने और लोगों को एकजुट करने के उद्देश्य से विभिन्न धर्म सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, "समाज में एकता और परस्पर सहयोग की भावना को मजबूत करने के लिए ये कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जो लोग आध्यात्मिक साधना और समाज सेवा में लगे हुए हैं। वे इन सम्मेलनों में भाग लेकर राष्ट्र सेवा और आपसी एकता को बढ़ावा दे रहे हैं।" आरएसएस महासचिव ने कहा कि संघ ने समाज परिवर्तन के जो मार्ग बताए हैं, उनमें सभी लोगों को जुड़कर परस्पर सहयोग से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य है कि भारत मां की संतान के रूप में हर व्यक्ति अपने कर्तव्य को निभाए। समाज में एकता बनी रहे और लोग राष्ट्र के लिए कार्य करने की भावना से संकल्प लेकर आगे बढ़ें।

होसबोले ने कहा कि देश में कई चुनौतियां और संकट मौजूद हैं, लेकिन सरकार भी देश को अच्छी स्थिति में लाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, "धर्म सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य यही है कि हम सभी चुनौतियों को मिलकर पार करें और देश को मजबूत बनाएं।"

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आरएसएस महासचिव ने जोर देकर कहा कि इन सम्मेलनों के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, आपसी भाईचारा और राष्ट्रभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति आध्यात्मिक क्षेत्र में कार्यरत हैं, उन्हें समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि संघ किसी भी प्रकार के विभाजन या द्वेष को बढ़ावा नहीं देता, बल्कि वह समाज को एक सूत्र में पिरोने और सभी को राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हिंदू सम्मेलन, स्वधर्म सम्मेलन और धर्म सम्मेलन केवल धार्मिक चर्चा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सामाजिक एकता, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण पर भी गहन चर्चा की जाती है।

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