आम आदमी को राहत: नॉन-एसी कोच बढ़ाने के साथ रेलवे दे रहा भारी सब्सिडी

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार, किराए को कम रखने के लिए प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, कुल कोचों में करीब 70 प्रतिशत जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। इसके अलावा, 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़े जाने की योजना है। रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय

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Published On :

मार्च 18, 2026

नई दिल्ली
भारतीय रेलवे यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के लिए नॉन-एसी जनरल और स्लीपर कोच की संख्या बढ़ा रहा है। सरकार के अनुसार, किराए को कम रखने के लिए प्रति यात्री औसतन करीब 45 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। रेल मंत्रालय के मुताबिक, कुल कोचों में करीब 70 प्रतिशत जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। इसके अलावा, 2024-25 में लगभग 1,250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025-26 में करीब 860 और कोच जोड़े जाने की योजना है। रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। वहीं, मुंबई जैसे उपनगरीय इलाकों के लिए करीब 3,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि माल ढुलाई (फ्रेट) में भी बड़ा इजाफा हुआ है। यह 2013-14 के 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गया है, जिससे भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे का विद्युतीकरण तेजी से बढ़ा है और अब लगभग 47,000 किलोमीटर ट्रैक इलेक्ट्रिफाई हो चुका है, यानी नेटवर्क का 99 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बिजली से चल रहा है।

ट्रैक निर्माण में भी तेजी आई है। पहले जहां करीब 15,000 किलोमीटर ट्रैक बनाए गए थे, वहीं अब यह बढ़कर करीब 35,000 किलोमीटर हो गया है। सुरक्षा के लिहाज से भी रेलवे ने बड़ा काम किया है। रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या करीब 4,000 से बढ़कर 14,000 हो गई है। वहीं, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से ज्यादा हो गई है।

रेल मंत्री ने बताया कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके तहत ट्रैक और ट्रेन (रोलिंग स्टॉक) की मेंटेनेंस, नई तकनीक और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एलएचबी कोच (ज्यादा सुरक्षित कोच) की संख्या तेजी से बढ़ी है और हाल के वर्षों में करीब 48,000 कोच जोड़े गए हैं।

इसके अलावा, लोकोमोटिव (इंजन) की संख्या करीब 12,000 तक पहुंच गई है और वैगन (माल ढुलाई डिब्बे) की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो गई है। सरकार ने परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर एक मजबूत सिस्टम बनाया है। रेल मंत्री ने बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) में भी तेजी से काम हुआ है। अब तक करीब 2,800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है, जहां रोजाना लगभग 480 मालगाड़ियां चल रही हैं।

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