Reliance Capital Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से प्राप्त लिखित शिकायत के आधार पर 31 जुलाई 2026 को रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL), उसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों तथा अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसी के अनुसार मामला कथित आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और अन्य वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
ईपीएफओ को कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये का नुकसान
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कथित अनियमितताओं के कारण ईपीएफओ को 1,007.55 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त 808.67 करोड़ रुपये की ब्याज देनदारी भी उत्पन्न होने का दावा किया गया है। इस प्रकार कुल कथित वित्तीय प्रभाव 1,816.22 करोड़ रुपये बताया गया है। ये सभी आंकड़े शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर दर्ज किए गए हैं तथा इनकी पुष्टि आगे की जांच के बाद होगी।
रिलायंस कैपिटल ने जारी किए थे सिक्योर्ड एनसीडी
सीबीआई के अनुसार वर्ष 2013 और 2014 के दौरान रिलायंस कैपिटल लिमिटेड ने सिक्योर्ड नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी किए थे। इन डिबेंचरों में ईपीएफओ ने रिलायंस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड सहित चार पोर्टफोलियो मैनेजरों के माध्यम से लगभग 2,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। शिकायत के अनुसार इन एनसीडी की परिपक्वता (मैच्योरिटी) वर्ष 2023 और 2024 में निर्धारित थी।
फंड डायवर्जन और धोखाधड़ी के आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने कथित रूप से धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन और फंड्स के दुरुपयोग (फंड डायवर्जन) के माध्यम से ऐसी स्थिति उत्पन्न की, जिसके कारण रिलायंस कैपिटल एनसीडी का भुगतान समय पर नहीं कर सकी। सीबीआई के अनुसार इसी वजह से ईपीएफओ को भारी वित्तीय नुकसान होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
सीबीआई ने जांच शुरू की
एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि इस पूरे मामले में किन-किन व्यक्तियों की क्या भूमिका रही। इसके साथ ही अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जाएगी। एजेंसी निवेश की गई राशि के अंतिम उपयोग (एंड यूज) और कथित वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला की भी जांच करेगी।
सभी पहलुओं की होगी विस्तृत जांच
सीबीआई का कहना है कि जांच के दौरान कथित आपराधिक साजिश, निवेश प्रक्रिया, निर्णय लेने की प्रक्रिया, दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जाएगी। इसके अलावा संबंधित संस्थाओं और व्यक्तियों से पूछताछ कर उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। एजेंसी का उद्देश्य मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाना और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट करना है।
रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों से जुड़े मामले भी जांच में
सीबीआई ने यह भी जानकारी दी है कि इससे पहले विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से प्राप्त शिकायतों के आधार पर रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों के खिलाफ भी कई मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (RTL) से जुड़े मामले शामिल हैं।
पहले से दर्ज मामलों में भी जांच जारी
सीबीआई के अनुसार इन कंपनियों से संबंधित मामलों में अब तक सात एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें चार आरोपपत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल किए जा चुके हैं और सात आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है। एजेंसी ने बताया कि इन मामलों की जांच अभी भी जारी है और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है। सीबीआई ने यह भी कहा कि वह सभी मामलों की निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल ताजा मामले में भी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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