राजस्थान में 76 हजार से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती, जानें पद के हिसाब से कितनी मिलेगी सैलरी

जयपुर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की किल्लत को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश भर के विभिन्न जिलों में शिक्षकों की कमी को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के बीच सरकार ने 'विद्या संबल योजना' के तहत बड़े पैमाने पर भर्ती का फैसला लिया है. इस योजना के जरिए प्रदेश के सभी स्कूलों में कुल 76,000 गेस्ट फैकल्टी (शिक्षकों) की तैनाती की जाएगी।  शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए गाइडलाइन तय की है. योजना के मुताबिक, विभाग हर एक

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Published On :

अगस्त 26, 2026

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जयपुर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की किल्लत को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रदेश भर के विभिन्न जिलों में शिक्षकों की कमी को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों के बीच सरकार ने 'विद्या संबल योजना' के तहत बड़े पैमाने पर भर्ती का फैसला लिया है. इस योजना के जरिए प्रदेश के सभी स्कूलों में कुल 76,000 गेस्ट फैकल्टी (शिक्षकों) की तैनाती की जाएगी। 

शिक्षा विभाग ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए गाइडलाइन तय की है. योजना के मुताबिक, विभाग हर एक खाली पद के लिए तीन आवेदनों को शॉर्टलिस्ट करेगा. इसके बाद आवेदकों की योग्यता और मेरिट के आधार पर सबसे योग्य उम्मीदवार को शिक्षक के रूप में स्कूल में नियुक्त किया जाएगा। 

कक्षा के हिसाब से तय हुआ मानदेय 
विद्या संबल योजना के तहत नियुक्त होने वाले शिक्षकों को प्रति घंटे (Hourly Basis) के हिसाब से मानदेय दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम मासिक सीमा भी तय की गई है:

कक्षा 1 से 8वीं (प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक): ₹300 प्रति घंटा (अधिकतम ₹21,000 प्रति माह)

कक्षा 9वीं और 10वीं (माध्यमिक): ₹350 प्रति घंटा (अधिकतम ₹25,000 प्रति माह)
कक्षा 11वीं और 12वीं (उच्च माध्यमिक): ₹400 प्रति घंटा (अधिकतम ₹30,000 प्रति माह)

आंदोलनों के बीच सरकार का बड़ा फैसला
गौरतलब है कि राजस्थान के कई इलाकों में सरकारी स्कूलों में विषय अध्यापकों के पद खाली होने के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी. इसे लेकर स्थानीय स्तर पर अभिभावक और छात्र लगातार विरोध-प्रदर्शन और तालाबंदी कर रहे थे. सरकार के इस फैसले से जहां एक तरफ स्कूलों में शिक्षकों की कमी तुरंत पूरी होगी, वहीं दूसरी तरफ युवाओं को रोजगार का मौका भी मिलेगा।