रांची का कांके डैम होगा साफ, एसटीपी और नैनो टेक्नोलॉजी से रुकेगा प्रदूषण

रांची  राजधानी रांची के प्रमुख जलस्रोत कांके डैम को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बड़ी पहल शुरू की है। डैम के पानी की गुणवत्ता खराब मिलने के बाद विभाग अब हाईटेक तकनीक के जरिए इसकी सफाई कराने की तैयारी में जुट गया है। इसके तहत कांके डैम के आसपास चार स्थानों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए जाएंगे, ताकि गंदे पानी को सीधे डैम में जाने से रोका जा सके। हाल ही में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने अधिकारियों के साथ कांके डैम के पानी की गुणवत्ता की समीक्षा

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Published On :

मई 9, 2026

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रांची

 राजधानी रांची के प्रमुख जलस्रोत कांके डैम को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने की दिशा में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बड़ी पहल शुरू की है। डैम के पानी की गुणवत्ता खराब मिलने के बाद विभाग अब हाईटेक तकनीक के जरिए इसकी सफाई कराने की तैयारी में जुट गया है।

इसके तहत कांके डैम के आसपास चार स्थानों पर एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए जाएंगे, ताकि गंदे पानी को सीधे डैम में जाने से रोका जा सके। हाल ही में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने अधिकारियों के साथ कांके डैम के पानी की गुणवत्ता की समीक्षा की।

जांच के दौरान पानी में हरे रंग की मात्रा अधिक पाई गई। अधिकारियों के अनुसार यह स्थिति जल प्रदूषण का संकेत है, जिसके कारण पानी को साफ करने में जरूरत से ज्यादा केमिकल का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

समीक्षा बैठक में सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डैम की सफाई के लिए आधुनिक तकनीक अपनाई जाए और जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। विभाग सचिव ने निर्देश दिया है कि कांके डैम में नैनो फिल्टर तकनीक अपनाई जाएगी। इससे पानी की सफाई के साथ-साथ पानी में अक्सीजन की मात्रा को भी बढ़ाया जाएगा

नैनो फिल्टर तकनीक से होगी सफाई
विभाग ने डैम की सफाई के लिए नैनो फिल्टर तकनीक लागू करने का प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही इसे कांके डैम में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से डैम के भीतर माइक्रो बबल और आक्सीजन की मात्रा बढ़ाई जाएगी। इससे पानी प्राकृतिक रूप से अधिक साफ होगा और जल की गुणवत्ता में सुधार आएगा। साथ ही डैम में वर्षों से जमी गाद को कम करने में भी मदद मिलेगी।

नैनीताल मॉडल पर काम करेगी योजना
जानकारी के अनुसार, नैनो फिल्टर तकनीक का उपयोग वर्ष 2016 में नैनीताल में जल संकट के दौरान किया जा चुका है। वहां इस तकनीक के सकारात्मक परिणाम सामने आए थे। अब उसी मॉडल को रांची में लागू करने की तैयारी चल रही है। विभाग की ओर से इस योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद कार्य को युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा।

बढ़ाई जाएगी ऑक्सीजन की मात्रा
विभागीय इंजीनियरों के अनुसार वर्तमान में गेतलसूद डैम के पानी में लगभग 10 पीपीएम आक्सीजन मौजूद है। विभाग का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 20 पीपीएम तक पहुंचाना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी में आक्सीजन की मात्रा 4 पीपीएम से नीचे चली जाए तो मछलियों और अन्य जलजीवों के लिए खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में नई तकनीक पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।

करोड़ों की मशीन खरीदने की तैयारी
नैनो फिल्टर तकनीक को लागू करने के लिए विभाग करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक मशीन खरीदने की तैयारी में है। इसके लिए विभागीय स्तर पर कई दौर की बैठक हो चुकी है

मशीन चयन के लिए एक विशेष टीम का गठन भी किया गया है। साथ ही नैनीताल के इंजीनियरों से तकनीकी सहयोग लेने और रांची के इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जा रही है।

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