
UP News: लखनऊ में मंगलवार, 14 अक्टूबर को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कामकाज की तारीफ की। उन्होंने कहा कि साल 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश में विकास, कानून-व्यवस्था और सुशासन के क्षेत्र में नई ऊर्जा देखने को मिली है। मुख्यमंत्री ने यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। कोविन्द ने कहा कि प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास महत्वपूर्ण हैं और इनसे आम लोगों के लिए रोजगार, शिक्षा और आर्थिक तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं।
योगी सरकार के विकास कार्यों से यूपी को मिली नई पहचान

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द अपनी आत्मकथा‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा, मेरा जीवन, मेरा संघर्ष के हिंदी संस्करण के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और मेट्रो जैसी बड़ी परियोजनाओं से लोगों का सफर आसान हुआ है। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं के जरिए गांवों और जरूरतमंद परिवारों तक विकास का लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन योजनाओं का फायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगा।
गरीबों को पक्का मकान मिलने से बढ़ा सम्मान और सुरक्षा का एहसास
रामनाथ कोविन्द ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि कानपुर देहात के परौंख गांव में उनका घर बेहद साधारण था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें ऐसे परिवारों की परेशानी याद आई, जो आज भी बेहतर जीवन का सपना देखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्के मकान मिलने से सिर्फ रहने की जगह नहीं मिलती, बल्कि सम्मान और सुरक्षा का एहसास भी होता है। टपकती छत के नीचे रहने वाले लोग ही पक्के घर की अहमियत अच्छी तरह समझ सकते हैं।
शिक्षा, मेहनत और अच्छे संस्कारों से हासिल किया राष्ट्रपति पद

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उनके पिता ने परिवार की जमीन अपने पास रखने के बजाय बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। ईमानदारी, करुणा, उदारता और न्याय जैसे संस्कार उन्हें अपने पिता से मिले। उन्होंने कहा कि परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान की ताकत का उदाहरण भी है। भारत में सामान्य परिवार से आने वाला व्यक्ति भी मेहनत, योग्यता और लगन के दम पर देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद तक पहुंच सकता है।
प्रयागराज महाकुंभ ने दुनिया को दिखाई भारत की आध्यात्मिक ताकत
रामनाथ कोविन्द ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान बुद्ध, महावीर, संत कबीर और संत रविदास की धरती है। उन्होंने साल 2025 में प्रयागराज में हुए महाकुंभ को भारत की आध्यात्मिक चेतना, आस्था और सामाजिक एकता का बड़ा उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, देश की प्राचीन परंपराएं आज भी करोड़ों लोगों को एक साथ जोड़ने की ताकत रखती हैं।
युवाओं से राजनीति और सार्वजनिक जीवन में आने की अपील
पूर्व राष्ट्रपति ने युवाओं से कहा कि लोकतंत्र में उनकी भागीदारी केवल वोट डालने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। देश और प्रदेश में बेहतर शासन के लिए ईमानदार, योग्य और संवेदनशील लोगों का राजनीति में आना जरूरी है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने और मुश्किल परिस्थितियों में भी हार न मानने की अपील की।
ब्रजेश पाठक और केशव मौर्य ने भी की रामनाथ कोविन्द की तारीफ
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी अपनी सादगी और सहजता बनाए रखी। उन्होंने गरीबों, पीड़ितों और वंचितों की आवाज उठाने में कोविन्द की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। पाठक ने संसद से लेकर बिहार के राज्यपाल और राष्ट्रपति पद तक उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ से जुड़ी समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया।

वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का जीवन बताता है कि बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी व्यक्ति को अपने संस्कार और विनम्रता नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बनने के बाद भी कोविन्द पुराने साथियों और परिचितों से उसी आत्मीयता से मिलते रहे।
सतीश महाना ने विधानसभा सदस्यों के लिए मांगीं 500 पुस्तकें
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने रामनाथ कोविन्द को सादगी, विनम्रता और दृढ़ संकल्प का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बावजूद कोविन्द जमीन से जुड़े रहे। महाना ने इच्छा जताई कि उनकी आत्मकथा विधानसभा के सभी सदस्यों तक पहुंचे, ताकि वे उनके संघर्ष और अनुभवों से सीख सकें। इसके लिए उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति से विधायकों के लिए 500 पुस्तकें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया और कहा कि इन पुस्तकों का पूरा भुगतान वह खुद करेंगे।











