Donation Scam: हिंदुओं की अगाध आस्था का प्रतीक अयोध्या स्थित राम मंदिर इन दिनों चढ़ावा चोरी के संगीन आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की परतें उखाड़ना शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि मंदिर प्रशासन के भीतर दान की राशि गिनने में लगे कुछ लोगों ने लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं का फायदा उठाया। लगातार छोटी शिकायतों की अनदेखी ने इन अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि उन्होंने सीधे भगवान के चढ़ावे को ही अपना निशाना बना लिया।
श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड तोड़ संख्या से बढ़ा दान का बोझ
बताते चले कि, साल 2025 की शुरुआत में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अप्रत्याशित उछाल देखा गया। आम दिनों में जहां राम मंदिर में 85 हजार से 1 लाख तक श्रद्धालु दर्शन करते हैं, वहीं 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 के बीच यह तादाद रोजाना 10 से 12 लाख तक पहुंच गई थी। श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ के कारण दानपेटियों में चढ़ावे की राशि कई गुना बढ़ गई, जिससे मंदिर प्रबंधन के सामने नकदी के प्रबंधन की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।
कैश काउंटिंग में लापरवाही
आपको बता दे कि, मंदिर प्रशासन ने बढ़े हुए दान को संभालने और उसे व्यवस्थित रूप से गिनने के लिए अतिरिक्त कर्मियों को नियुक्त करने का निर्णय लिया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की सहायता के लिए एक निजी फर्म के माध्यम से स्थानीय स्तर पर स्टाफ हायर किया गया था। यह पूरी प्रक्रिया आपसी विश्वास और भरोसे पर टिकी थी। हालांकि, मंदिर प्रशासन को यह अंदेशा तक नहीं था कि जिस काम के लिए अतिरिक्त मदद ली जा रही है, वही लोग सुरक्षा मानकों में सेंध लगाकर गबन की साजिश रचेंगे।
शिकायतों के बावजूद नहीं चेता सिस्टम
जांच में यह भी स्पष्ट हो रहा है कि मंदिर के चढ़ावे की गिनती में शामिल लोगों के पास गबन के पर्याप्त अवसर इसलिए बने क्योंकि सिस्टम में मौजूद कमियों पर पहले ध्यान नहीं दिया गया। दान की गिनती के दौरान पहले भी कुछ छोटी शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन उन्हें समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी प्रशासनिक लापरवाही का लाभ उठाते हुए जालसाजों ने महाकुंभ के दौरान जब भीड़ चरम पर थी, तब बड़े पैमाने पर हाथ साफ कर दिए।
अब दोषियों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
वर्तमान में SIT इस पूरे मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है। मंदिर ट्रस्ट और बैंक प्रशासन भी इस मामले की आंतरिक समीक्षा कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। RSS जैसे संगठनों ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए ट्रस्ट को खामियां दूर करने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह पता चलेगा कि इस साजिश का मास्टरमाइंड कौन था और इस बड़े आर्थिक गबन में और कौन-कौन से चेहरे शामिल थे।










