Ram Mandir Donation Row: कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, उच्च स्तरीय जांच की मांग

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज नष्ट कर सबूतों से छेड़छाड़ की गई है और इसमें एक संगठित गिरोह शामिल है।

Ram Mandir Donation Row

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 2, 2026

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखकर पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराने का आग्रह किया है। वेणुगोपाल ने साफ शब्दों में कहा है कि यह प्रकरण करोड़ों भारतीयों की आस्था के साथ सीधा विश्वासघात है, जिसे किसी भी कीमत पर अनदेखा नहीं किया जा सकता।

संगठित गिरोह का सक्रिय होना और संस्थागत विफलता का गंभीर आरोप

केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि प्रारंभिक पड़ताल में एक ‘संगठित गिरोह’ के सक्रिय होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित लूट में संस्थागत विफलताओं का बड़ा हाथ है, और बिना किसी ऊंचे स्तर के संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर गबन संभव नहीं है। उनका मानना है कि मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट के हर स्तर पर मौजूद खामियों ने इस भ्रष्टाचार को फलने-फूलने का मौका दिया है।

CCTV फुटेज नष्ट करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ का दावा

कांग्रेस महासचिव ने वित्तीय धांधली के तरीके पर रोशनी डालते हुए दावा किया कि नकदी गिनने वाले कर्मचारियों ने निगरानी तंत्र को पूरी तरह दरकिनार कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर की दान पेटी से नकद और कीमती आभूषणों को चुराने के इस आपराधिक षड्यंत्र को छिपाने के लिए महीनों की सीसीटीवी फुटेज को जानबूझकर नष्ट कर दिया गया। इतना ही नहीं, गबन और चोरी से जुड़ी शिकायतों को या तो दबा दिया गया या फिर संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें सिरे से नजरअंदाज किया गया।

SIT जांच पर उठे सवाल

वेणुगोपाल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि एसआईटी और उसके बाद दर्ज की गई प्राथमिकी ‘महज एक दिखावा’ है, जिसका मकसद केवल खानापूर्ति करना है। उन्होंने याद दिलाया कि ट्रस्ट के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी की चेतावनियों और एसबीआई द्वारा उठाए गए सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस नेता ने जोर दिया कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ एक सार्वजनिक ट्रस्ट है, इसलिए इसे पारदर्शिता और जवाबदेही के उच्चतम मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

पीएम मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की अपील

पत्र के अंत में वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के नाम पर हो रही यह वित्तीय हेराफेरी हिंदू आस्था और उस पवित्र संस्था के साथ बड़ा धोखा है। कांग्रेस की मांग है कि दोषियों को बचाने की कोशिश बंद हो और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी में एक निष्पक्ष एजेंसी से दूध का दूध और पानी का पानी किया जाए। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाता है।