
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुधवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट से लगातार तीन बार समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रहे राकेश प्रताप सिंह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उनके साथ अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
तीनों विधायकों के भाजपा में आने से प्रदेश की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है। खास तौर पर अमेठी और आसपास के इलाकों में इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि इन नेताओं के पार्टी बदलने से भाजपा को कितना राजनीतिक फायदा मिलता है और समाजवादी पार्टी अपने पुराने जनाधार को किस तरह संभालती है।
गौरीगंज में राकेश प्रताप सिंह के आवास पर हुआ भाजपा सदस्यता कार्यक्रम
बताते चले कि, राकेश प्रताप सिंह के गौरीगंज स्थित जामो रोड के आवास मंगलम पर सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने तीनों विधायकों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें भगवा पटका पहनाकर भाजपा में उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कई मंत्री, विधायक और भाजपा के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता भी पहुंचे। आयोजन को देखते हुए राकेश प्रताप सिंह के आवास के सामने बनाए गए पंडाल में करीब पांच हजार कुर्सियों की व्यवस्था की गई थी। तीनों विधायकों ने पार्टी के टोल फ्री नंबर पर फोन करके औपचारिक रूप से सदस्यता भी ग्रहण की।
राज्यसभा चुनाव के बाद सपा से बढ़ी दूरी
आपको बता दे कि, राकेश प्रताप सिंह के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो उन्होंने वर्ष 2012 में पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर गौरीगंज विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में भी वह विधायक चुने गए। इस तरह उन्होंने लगातार तीन चुनाव जीतकर क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाई।

हालांकि, वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान उनके और सपा नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ गई थी। राकेश प्रताप सिंह ने पार्टी के रुख से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद जून 2025 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। अब भाजपा की सदस्यता लेकर उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नया रास्ता चुन लिया है।
700 ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधियों को साथ लाने का किया था दावा
भाजपा में शामिल होने से पहले राकेश प्रताप सिंह ने दावा किया था कि गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र के करीब 700 ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य उनके साथ भाजपा में आएंगे। इस दावे को लेकर अब स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि, इन जनप्रतिनिधियों में से कितने लोग वास्तव में भाजपा में शामिल होते हैं, यह आगे की स्थिति से साफ होगा। अगर बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि उनके साथ आते हैं, तो इससे गौरीगंज में भाजपा की संगठनात्मक ताकत बढ़ सकती है।
गौरीगंज विधानसभा में बदलेंगे सियासी समीकरण?
राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में शामिल होने के बाद गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। तीन बार विधायक रह चुके राकेश प्रताप सिंह का व्यक्तिगत जनाधार आगामी विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। भाजपा को उम्मीद होगी कि उनके अनुभव और स्थानीय पकड़ से पार्टी को क्षेत्र में मजबूती मिलेगी।

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी के सामने अपने पुराने समर्थकों को जोड़े रखने की चुनौती रहेगी। वहीं, भाजपा के लिए राकेश प्रताप सिंह के समर्थकों और पहले से सक्रिय स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल बनाना भी जरूरी होगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राकेश प्रताप सिंह भाजपा में आने के बाद गौरीगंज में पार्टी की स्थिति को और मजबूत कर पाएंगे? इसका जवाब आने वाले समय में स्थानीय संगठन की सक्रियता और चुनावी नतीजों से ही सामने आएगा।











