UP Politcs: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अलग-अलग दलों के विधायक और नेताओं के बीच मुलाकातों का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक अब्बास अंसारी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह बैठक लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय के जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में हुई। करीब डेढ़ घंटे चली इस मुलाकात के बाद यूपी की राजनीति में इसके संभावित सियासी असर को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अखिलेश यादव और अब्बास अंसारी की डेढ़ घंटे चली मुलाकात
बताते चले कि, अब्बास अंसारी उत्तर प्रदेश में सुभासपा के विधायक हैं और सुभासपा वर्तमान में एनडीए गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में एनडीए के सहयोगी दल के विधायक की सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लंबी मुलाकात को राज्यसभा चुनाव के मौजूदा राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मुलाकात के दौरान किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसे लेकर दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

बैठक ऐसे समय हुई है जब राज्यसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपने-अपने विधायकों के समर्थन को लेकर रणनीति तैयार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। चुनाव कार्यक्रम के तहत नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने विधायकों के साथ समीकरणों पर मंथन कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों पर नजर
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर राम गोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की रणनीति पर भी काम किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना सपा के सामने अहम राजनीतिक चुनौती हो सकती है।
राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों की जीत के लिए विधानसभा में दलों की संख्या और उपलब्ध वोटों का गणित महत्वपूर्ण होता है। सपा के पास मौजूद विधायकों के आधार पर पार्टी के दो उम्मीदवारों की स्थिति और तीसरे उम्मीदवार के लिए संभावित समर्थन का गणित अलग-अलग है। इसी वजह से दूसरे दलों के विधायकों के रुख पर भी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।
सुभासपा विधायक की सपा प्रमुख से मुलाकात क्यों अहम?
अब्बास अंसारी और अखिलेश यादव की मुलाकात को लेकर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आ रही हैं। इसकी एक वजह यह है कि सुभासपा एनडीए गठबंधन में शामिल है, जबकि समाजवादी पार्टी विपक्षी गठबंधन की प्रमुख पार्टियों में रही है। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक ने राज्यसभा चुनाव से पहले संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलों को हवा दी है।

हालांकि, केवल एक मुलाकात के आधार पर किसी राजनीतिक फैसले या समर्थन के निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि बैठक में राज्यसभा चुनाव में समर्थन, विधानसभा से जुड़े मुद्दों या किसी अन्य राजनीतिक विषय पर चर्चा हुई।
राज्यसभा चुनाव में समर्थन जुटाने की कवायद
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों के समर्थन का आकलन कर रहे हैं। राज्यसभा चुनाव में सीधे जनता मतदान नहीं करती, बल्कि निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। इसलिए विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बनती है।
समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की स्थिति में अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में दूसरे दलों के विधायकों और संभावित सहयोगियों के रुख पर राजनीतिक दलों की नजर रहना स्वाभाविक है।
यूपी की राजनीति में आगे और बढ़ सकती हैं मुलाकातें
राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए आने वाले दिनों में नेताओं और विधायकों की मुलाकातें और बढ़ सकती हैं। अखिलेश यादव और अब्बास अंसारी की बैठक ने फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि राज्यसभा चुनाव में सुभासपा और उसके विधायकों का रुख क्या रहता है और समाजवादी पार्टी अपने तीसरे उम्मीदवार के लिए किस तरह का समर्थन जुटाती है।










