Rajpal Yadav: दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, अभिनेता राजपाल यादव को जाना पड़ा तिहाड़ जेल

चेक बाउंस मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई। दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अभिनेता राजपाल यादव को तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा। जानिए क्यों कोर्ट ने राहत देने से इनकार किया और क्या है पूरा विवाद।

अभिनेता राजपाल यादव को जाना पड़ा तिहाड़ जेल

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

फ़रवरी 5, 2026

Rajpal Yadav: बॉलीवुड अभिनेता और मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में आखिरकार तिहाड़ जेल जाना पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई सख्त चेतावनी और समय सीमा समाप्त होने के बाद गुरुवार को उन्होंने जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि अब उन्हें और कोई राहत नहीं दी जा सकती।

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तिहाड़ जेल में कब और कैसे किया सरेंडर?

जानकारी के अनुसार, राजपाल यादव ने गुरुवार शाम करीब 4 बजे तिहाड़ जेल पहुंचकर औपचारिक रूप से सरेंडर किया। जेल सूत्रों ने बताया कि अब उनके मामले में जेल प्रशासन मानक प्रक्रिया (SOP) के तहत आगे की कार्रवाई करेगा। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को ही यह स्पष्ट कर दिया था कि सरेंडर की समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।

समय सीमा बढ़ाने की अर्जी हुई थी खारिज

समय सीमा बढ़ाने की अर्जी हुई थी खारिज
समय सीमा बढ़ाने की अर्जी हुई थी खारिज

राजपाल यादव को अदालत ने पहले निर्देश दिया था कि वे बुधवार शाम 4 बजे तक आत्मसमर्पण करें। अभिनेता की ओर से उनके वकील ने अदालत में दलील दी थी कि उन्होंने 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया है और शेष भुगतान के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। हालांकि, न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि समय बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है।

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक प्राइवेट कंपनी मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी का आरोप है कि राजपाल यादव ने फिल्म प्रोडक्शन के लिए उनसे करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस रकम को लौटाने के लिए उन्होंने कई चेक दिए, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए। इसके बाद कंपनी ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक चला केस

निचली अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। बाद में हाईकोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उनकी सजा पर अस्थायी रोक लगाई थी, जिसमें कंपनी को तय राशि चुकाने की शर्त शामिल थी। कोर्ट के सामने कई बार भुगतान का वादा किया गया, लेकिन बार-बार तय समय पर रकम जमा नहीं की गई।

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कोर्ट ने क्यों अपनाया सख्त रुख?

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राजपाल यादव का रवैया अदालत के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रहा है। उन्हें कई मौके दिए गए, लेकिन हर बार उन्होंने कोर्ट के भरोसे को तोड़ा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कानून का सम्मान सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या मशहूर अभिनेता। इसी वजह से अदालत ने आगे किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।

अब आगे क्या?

राजपाल यादव के सरेंडर के बाद अब उनकी सजा से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जेल प्रशासन नियमों के अनुसार आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करेगा। यह मामला फिल्म इंडस्ट्री और आम जनता के लिए भी एक संदेश है कि कानूनी मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है।

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