
Rajnath Singh News : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेताओं पर आरोप लगाया है कि वे गलत सूचनाओं, भ्रामक प्रचार और बेबुनियाद आरोपों के जरिए राजनीतिक माहौल में भ्रम पैदा कर रहे हैं। एक समाचार पत्र में प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में तथ्यों की जगह भावनात्मक और भड़काऊ बयानबाजी लेती जा रही है। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखने को जरूरी बताया।
झूठे प्रचार से लोकतांत्रिक संस्थाओं को खतरा
राजनाथ सिंह ने अपने लेख में ‘पोस्ट-ट्रुथ’ राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौर में आरोपों को बार-बार दोहराकर सच के रूप में पेश करने की कोशिश की जाती है। उनके मुताबिक, बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप जनमत को प्रभावित करने के साथ लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति जरूरी है, लेकिन इसे झूठ और अराजकता का माध्यम नहीं बनना चाहिए।

EVM और SIR के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा
रक्षा मंत्री ने विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे तीन प्रमुख मुद्दों का उल्लेख किया। इनमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM की विश्वसनीयता, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन मुद्दों पर बार-बार आरोप लगाए जाने से चुनावी प्रक्रिया को लेकर जनता के बीच संदेह पैदा किया जा रहा है।
EVM विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला
राजनाथ सिंह ने अपने लेख में EVM से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने 2024 में चुनाव प्रक्रिया और पेपर बैलेट पर लौटने की मांग से जुड़े मामले में विचार किया था। उनके अनुसार, चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए ठोस सबूत और प्रमाण जरूरी हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि अदालत की टिप्पणियों के बावजूद EVM को लेकर संदेह जताने का सिलसिला जारी है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण को बताया जरूरी
SIR को लेकर उठ रहे सवालों पर रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का सटीक और विश्वसनीय होना आवश्यक है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के साथ मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना भी निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।
चुनाव आयोग की नियुक्ति और कांग्रेस का रिकॉर्ड
राजनाथ सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में संस्थाओं की स्वायत्तता को कई बार चुनौती दी गई। वहीं, उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को बहुसदस्यीय चयन समिति के जरिए संस्थागत रूप दिया है।
आपातकाल और मोदी सरकार की तुलना
रक्षा मंत्री ने आपातकाल के दौरान हुए संवैधानिक बदलावों का जिक्र करते हुए कांग्रेस की आलोचना की। इसके विपरीत उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के संवैधानिक फैसलों का बचाव किया। उन्होंने राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 हटाने के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने न्यायपालिका के फैसलों का सम्मान किया है।

कृषि कानून और असहमति का लोकतांत्रिक अधिकार
राजनाथ सिंह ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को लेकर लोगों की चिंताओं को सुनने के बाद सरकार ने उन्हें वापस लेने का फैसला किया था। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और जनभावनाओं के सम्मान का उदाहरण बताया।
अराजकता और असहमति के बीच अंतर
लेख के अंत में रक्षा मंत्री ने डॉ. बी.आर. आंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका आधार तथ्य होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे आलोचना और अराजकता के बीच अंतर समझें तथा संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बनाए रखने में जिम्मेदारी निभाएं।
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