Rahul Gandhi Ayodhya Visit: उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर अब पूरी तरह तैयार हो चुका है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बन गया है। प्रतिदिन लाखों भक्त सरयू तट पर पहुंचकर रामलला के दर्शन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार के कई मंत्री और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री पहले ही यहां मत्था टेक चुके हैं। मंदिर की भव्यता और धार्मिक महत्व पर चर्चा जारी है, वहीं विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी की अनुपस्थिति पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
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सांसद तनुज पुनिया का खुलासा

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने इस विषय पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी जल्द ही अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करेंगे। गोंडा दौरे पर पत्रकारों से बातचीत में पुनिया ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की यात्रा अब केवल समय की बात है। इससे उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें राहुल गांधी की धार्मिक यात्राओं पर सवाल उठाए जा रहे थे।
अधूरे मंदिर में पूजा न करने का तर्क
तनुज पुनिया ने राहुल गांधी के अब तक अयोध्या न जाने के पीछे धार्मिक और तकनीकी कारण भी बताए। उनके अनुसार, कांग्रेस का मानना था कि जब तक मंदिर का निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता और शिखर पर ध्वज की स्थापना नहीं होती, तब तक दर्शन करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्यों ने भी यही राय दी थी कि अधूरे मंदिर में पूजा का कोई औचित्य नहीं है। अब जब मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है और शिखर पर ध्वज स्थापित हो गया है, तो राहुल गांधी की यात्रा का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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शिखर पर ध्वजारोहण का महत्व
पिछले वर्ष 25 नवंबर को राम मंदिर में ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह आयोजित हुआ था। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और RSS प्रमुख मोहन भागवत मुख्य अतिथि थे। मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराना इस बात का प्रतीक था कि मंदिर का मुख्य ढांचा शास्त्रों के अनुसार पूर्ण हो चुका है। इस समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इसी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति में बदलाव के संकेत दिए।
बदलते राजनीतिक समीकरण
राहुल गांधी का प्रस्तावित अयोध्या दौरा भारतीय राजनीति में अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा के ‘हिंदुत्व’ कार्ड के जवाब में कांग्रेस अपनी ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की छवि को मजबूत करना चाहती है। तनुज पुनिया के बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। अयोध्या अब केवल धार्मिक नगरी नहीं रही, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़ा राजनीतिक केंद्र बन चुकी है।










