Rahul Gandhi: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापारिक समझौतों (Trade Deal) के फ्रेमवर्क को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर चौतरफा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई गंभीर सवाल पूछे हैं और आरोप लगाया कि यह समझौता देश के कृषि क्षेत्र और विशेष रूप से कपास व सोयाबीन किसानों की कमर तोड़ देगा।
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DDG आयात और डेयरी सेक्टर पर निर्भरता का खतरा
बताते चले कि, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से पूछा कि अमेरिका से डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स (DDG) आयात करने का वास्तविक अर्थ क्या है। उन्होंने अंदेशा जताया कि इसका सीधा मतलब यह होगा कि भारतीय मवेशियों को अब जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) अमेरिकी मक्के से बना चारा खिलाया जाएगा। राहुल गांधी ने सवाल किया कि क्या इस एग्रीकल्चरल इम्पोर्ट पॉलिसी के कारण भविष्य में भारत का विशाल दुग्ध उत्पादन क्षेत्र अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर हो जाएगा? यह कदम आत्मनिर्भर भारत के दावों के उलट किसानों के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।
सोयाबीन उत्पादकों पर आर्थिक संकट
बताते चले कि, राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के सोयाबीन किसानों की चिंताओं को उठाते हुए पूछा कि यदि अमेरिका से GM सोयाबीन तेल के आयात की अनुमति दी जाती है, तो भारतीय किसानों का क्या होगा? उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी सस्ते तेल के बाजार में आने से घरेलू सोयाबीन उत्पादक एक और बड़े ‘प्राइस शॉक’ (कीमतों के झटके) का शिकार होंगे। उन्होंने “एडिशनल प्रोडक्ट्स” शब्द के पीछे छिपी मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भविष्य में दालों और अन्य महत्वपूर्ण फसलों के लिए भी भारतीय बाजार को अमेरिकी दबाव में खोला जाएगा?
नॉन-ट्रेड बैरियर और MSP सुरक्षा पर गहराते सवाल
विपक्ष के नेता ने नॉन-ट्रेड बैरियर (Non-Trade Barriers) हटाने की प्रक्रिया पर भी स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने पूछा कि क्या भविष्य में भारत पर GM फसलों के प्रति अपना रुख नरम करने या न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बोनस में कटौती करने का वैश्विक दबाव बढ़ेगा? राहुल गांधी के अनुसार, एक बार यह दरवाजा खुल गया, तो हर साल अमेरिकी हितों के लिए भारतीय फसलों को दांव पर लगाया जाएगा। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार के पास इस विदेशी व्यापार समझौते में भारतीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस ‘सेफगार्ड’ (सुरक्षा कवच) है?
कॉटन किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के बीच ‘कुआं और खाई’ की स्थिति
इससे पहले राहुल गांधी ने भारत-US अंतरिम व्यापार समझौते में टैरिफ प्रोविज़न (Tariff Provisions) को लेकर सरकार पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि भारतीय कपड़ों पर अमेरिका में 18% टैरिफ लगता है, जबकि बांग्लादेश को 0% टैरिफ का लाभ मिल रहा है, बशर्ते वह अमेरिकी कॉटन का उपयोग करे। राहुल गांधी ने सरकार से पूछा कि देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री और कपास किसानों को बचाने के लिए क्या रणनीति है? यदि भारत अमेरिकी कॉटन आयात करता है तो घरेलू किसान बर्बाद होंगे और यदि नहीं करता है तो विदेशी बाजारों में भारतीय कपड़ा प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएगा।
करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी और बेरोजगारी का अंदेशा
राहुल गांधी ने अंत में सरकार की बातचीत की शैली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक सही डील वह होती जो कपास किसानों और कपड़ा निर्यातकों, दोनों के हितों की रक्षा करती। उन्होंने चेतावनी दी कि इस गलत नीति के कारण लाखों लोग बेरोजगारी और आर्थिक तंगी की ओर धकेल दिए जाएंगे। भारत के कृषि क्षेत्र पर दीर्घकालिक विदेशी कब्जे की आशंका जताते हुए उन्होंने मांग की कि सरकार इन सभी तकनीकी और आर्थिक सवालों के पारदर्शी जवाब देश के किसानों को दे।
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