Rahul Gandhi Privilege Motion: भारत और अमेरिका ट्रेड डील को लेकर राजनीति में हडकंप मचा हुआ है, जिसके चलते अब तक कई नेताओं ने आपत्ति जताई है। इसी कड़ी में लोकसभा के बजट सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस बार भी मामले की शुरुआत भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर राहुल गांधी के बयान से हुई, जिससे सदन का माहौल गरमा दिया।
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राहुल गांधी का आरोप
आपको बता दें कि, राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्रेड डील के जरिए भारत को “बेच” दिया है। उनके अनुसार यह समझौता केवल एक आर्थिक लेन-देन नहीं बल्कि 1.5 अरब भारतीयों के भविष्य का आत्मसमर्पण है। उन्होंने दावा किया कि यह कदम बीजेपी के वित्तीय ढांचे की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया

बताते चलें कि, राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तुरंत आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी की बातों का गंभीर असर होता है, इसलिए उन्हें अपने आरोपों के सबूत पेश करने चाहिए। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि बिना प्रमाण के प्रधानमंत्री और सरकार पर ऐसे आरोप लगाना संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
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विशेषाधिकार हनन का नोटिस
रिजिजू ने आगे कहा कि वह राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल करेंगे। मीडिया से बातचीत में बताया कि संसद की कार्यवाही और प्रक्रिया के नियमों के अनुसार अगर कोई सदस्य किसी अन्य सदस्य पर गंभीर आरोप लगाना चाहता है तो उसे पहले नोटिस देना होता है और आरोपों को प्रमाणित करना होता है। राहुल गांधी ने बिना नोटिस दिए प्रधानमंत्री और हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जो नियमों का उल्लंघन है।
विवाद का केंद्र
- राहुल गांधी का आरोप: प्रधानमंत्री ने भारत और भारतीय हितों को “बेच” दिया।
- किरेन रिजिजू की मांग: आरोपों के सबूत पेश किए जाएं।
- अगला कदम: राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस।









