Rahul Gandhi on NEET Row: राहुल गांधी ने मोदी सरकार के सामने रखी तीन शर्तें, लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई की मांग

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नीट परीक्षा विवाद और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 साल में 152 पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ परिवार प्रभावित हैं। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पीएम मोदी से माफी की मांग की है।

Rahul Gandhi on NEET Row

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 22, 2026

Rahul Gandhi on NEET Row: संसद मार्च के दौरान आंदोलनकारी छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर लुटियंस दिल्ली से लेकर संसद भवन तक सियासी घमासान चरम पर है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर सुरक्षाबलों द्वारा किए गए बर्बर बल प्रयोग की कड़े शब्दों में निंदा की है। कांग्रेस नेता ने केंद्र की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले एक दशक में देश के भीतर 152 बार प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिसने देश के करोड़ों नौजवानों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है। राहुल गांधी ने शिक्षा तंत्र में व्यापक बदलाव की वकालत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की पुरजोर मांग की है।

सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे युवाओं के आक्रोश पर बोले नेता प्रतिपक्ष

संसदीय परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने पीड़ित छात्र-छात्राओं के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “देश के होनहार छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से लोकतांत्रिक प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सुरक्षाबलों ने उन पर लाठियां भांजकर उन्हें बुरी तरह लहूलुहान कर दिया।” राहुल गांधी ने व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में हुए 152 पेपर लीक मामलों में से आज तक एक भी रसूखदार दोषी को कड़ी सजा नहीं मिल सकी है। इसी लचर प्रशासनिक रवैये के कारण आज देश की समूची युवा पीढ़ी में वर्तमान परीक्षा प्रणाली और सरकारी व्यवस्था के प्रति अभूतपूर्व आक्रोश व्याप्त है, जिसे दबाने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार करने की सख्त जरूरत है।

देश की समूची शिक्षा व्यवस्था को नष्ट करने का आरोप

केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान हुकूमत ने देश के मजबूत शैक्षणिक ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के भविष्य यानी छात्रों की बुनियादी समस्याओं के प्रति रत्ती भर भी संवेदनशील नहीं है। राहुल गांधी ने एक चौंकाने वाला आर्थिक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि देश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं पर होने वाला कुल खर्च सरकार के सालाना शिक्षा बजट के लगभग बराबर पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, देश भर के करीब 1.32 लाख करोड़ रुपए छात्र केवल इस परीक्षा प्रणाली और उसकी तैयारियों में झोंक रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें केवल मानसिक प्रताड़ना और धांधली मिल रही है।

राहुल गांधी ने सरकार के सामने रखीं तीन बड़ी शर्तें

अकादमिक संकट और प्रश्नपत्रों की अनवरत चोरी के इस गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने सरकार की घेराबंदी करते हुए तीन अत्यंत महत्वपूर्ण मांगें पटल पर रखी हैं। उनकी पहली और सबसे प्रमुख मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दें, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में देश की समूची शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। दूसरी मांग के तहत, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। तीसरी और अंतिम मांग में उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ हुए इस जघन्य खिलवाड़ के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की जनता और छात्र समुदाय से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

सरकारी नौकरियों में बैकडोर एंट्री और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश

अपने वक्तव्य के अंतिम चरण में राहुल गांधी ने देश में चल रहे कथित नौकरी घोटाले और भ्रष्टाचार के सिंडिकेट पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा, “आज देश में हालात ऐसे बन चुके हैं कि जिस किसी भी व्यक्ति या माफिया के पास 40 से 50 लाख रुपए की मोटी रकम है, वह बैकडोर (पिछले दरवाजे) से बड़ी ही आसानी से सरकारी नौकरी में प्रवेश पा सकता है।”

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आज भारत की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी इतनी ज्यादा महंगी हो चुकी है कि देश का मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार आर्थिक बोझ तले दबकर आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सरकारी रोजगार के नाम पर छात्र-छात्राओं से करोड़ों रुपए ऐंठ लिए जाते हैं और अंत में पेपर लीक करके उन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया जाता है, जिससे आज देश का युवा खुद को ठगा हुआ और असहाय महसूस कर रहा है।