Congress Politics: मोदी विरोध में राहुल गांधी ने पार की हद? संसद से सड़क मचा सियासी घमासान

राहुल गांधी और मोदी सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में है। संसद में विरोध, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और विदेश में भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर दिए गए बयानों ने सियासी बहस तेज कर दी है। आखिर मोदी विरोध की राजनीति में राहुल गांधी की रणनीति क्या है और इसका कांग्रेस पर क्या असर पड़ सकता है?

Congress Politics

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 9, 2026

Congress Politics: देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार भाजपा नीत राजग गठबंधन की सरकार बनने के बाद से विपक्ष की हताशा अब चरम पर है। राज्य दर राज्य भाजपा का बढता जनाधार और केंद्र में बीते 12 वर्षों से कायम मोदी सरकार को हटाने के लिए अब विपक्षी दल किसी भी हद तक जाने से गुरेज नहीं कर रहे है। जनता के वोट की ताकत से राजग सरकार को हटा पाने में बार बार नाकाम रहे विपक्ष ने अब संसद के बजाय सड़क का रास्ता अख्तियार कर लिया है। संसद में सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस की अगुवाई में हर तरह की वर्जनाएं तोड़ी जा रही है।

विपक्षी दल राजनीति की आड़ में हठनीति पर उतर आये है। इसमे भी सबसे आगे है लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी। राहुल हर वह काम कर रहे है जो पूर्व के राजनेता करने की सोच भी नहीं सकते थे। हालांकि उनकी हर कोशिश को जनता का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है लेकिन वह अपने हठ पर कायम हैं।

राहुल गांधी की आक्रामक राजनीति पर सवाल

राहुल गांधी की आक्रामक राजनीति पर सवाल

बीते मानसून सत्र में राहुल और कांग्रेस के हठ का ही नतीजा था कि संसद की कार्यवाही लगातार बाधित रही। पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर और इस्तीफा हो जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर लगातार लोकसभा की कार्यवाही ठप्प रही। देश के जरूरी फैसलों पर चर्चा के लिए होने वाला मानसून सत्र राहुल और कांग्रेस के हठ की भेंट चढ़ गया। इसी दौरान राहुल गांधी ने और भी कई ऐसे काम किए जिसकी अपेक्षा किसी जिम्मेदार नेता विपक्ष से नहीं की जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध राहुल के सिर ऐसा चढ़ा कि वह देश के अति सुरक्षित क्षेत्र प्रधानमंत्री आवास के सामने की सड़क पर अपने दल बल के साथ धरने पर बैठ गये।

चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चाबंदी

चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चाबंदी

अभी यह हलचल सिमटी ही थी कि एक समाचार पत्र में छपी खबर को लेकर राहुल ने संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल अपनी कांग्रेसी टोली के साथ चुनाव आयोग के दफ्तर का घेराव करने निकल पड़े। पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के कारण जब वह चुनाव आयोग के दफ्तर नहीं पहुंच पाये तो उन्होंने बगल के आकाशवाणी जैसे अति सुरक्षित श्रेणी में आने वाले कार्यालय में बिना अनुमति घुस कर धरना देना शुरू कर दिया। किसी भी देश में दूरदर्शन और आकाशवाणी ऐसे स्थान होते जहां बिना अनुमति घुसना अपराध की श्रेणी में आता है।

हालांकि इस मामले में राहुल के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई लेकिन राहुल का हठ इतना है कि वह अपनी इस गलती पर भी सीनाजोरी करते हुए बोले कि अभी मेरे ऊपर 45 एफआईआर है और मैं चाहता हूं कि मुझ पर 100 एफआईआर हो।

विदेशी मंचों से मोदी सरकार पर राहुल के आरोप

विदेशी मंचों से मोदी सरकार पर राहुल के आरोप

केवल इतना ही नहीं मोदी विरोध में राहुल गांधी अपने विदेश दौरों में देश विरोधी बयानबाजी करते रहते है। बीते दिनो अपनी इंग्लैंड के दौरे पर राहुल गांधी ने कहा था कि भारत के संसद, स्वतंत्र मीडिया और न्यायपालिका जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया जा रहा है और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि उनके और कई अन्य नेताओं के फोन में पेगासस सॉफ्टवेयर डाला गया था, जिससे विपक्षी नेताओं पर लगातार दबाव रहता है। उन्होंने अफ़सोस जताया था कि अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के लोकतांत्रिक देश यह नहीं देख पा रहे हैं कि भारत में लोकतंत्र का एक बड़ा हिस्सा कमजोर हो रहा है।