Rahul Gandhi Manusmriti Controversy: शंकराचार्य की चेतावनी, माफी नहीं तो कांग्रेस के बहिष्कार का अभियान

राहुल गांधी की मनुस्मृति पर टिप्पणी के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की है और चेताया है कि ऐसा नहीं होने पर कांग्रेस के खिलाफ हिंदू बहिष्कार अभियान चलाया जा सकता है। अब नजर कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर है।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 28, 2026

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Rahul Gandhi Manusmriti Controversy:  मनुस्मृति को लेकर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अब संत समाज की ओर से भी उनके बयान का विरोध शुरू हो गया है। मामला कांग्रेस के बहिष्कार की अपील तक पहुंच गया है। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी पर सनातन धर्मग्रंथों के बार-बार अपमान का आरोप लगाते हुए उनसे अपने बयान को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।

शंकराचार्य बोले- धर्मग्रंथों की राजनीतिक नजरिए से व्याख्या न करें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि राहुल गांधी को धर्मग्रंथों की व्याख्या राजनीतिक लाभ-हानि के आधार पर नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर राहुल गांधी को मनुस्मृति या किसी अन्य धार्मिक ग्रंथ की किसी बात पर आपत्ति है, तो उन्हें पहले धर्माचार्यों से संवाद करना चाहिए। उनका कहना है कि संबंधित ग्रंथ के संदर्भ और अर्थ को समझने के बाद ही सार्वजनिक टिप्पणी की जानी चाहिए।

माफी नहीं मांगी तो कांग्रेस के बहिष्कार की मुहिम

शंकराचार्य ने राहुल गांधी से कथित तौर पर धर्मग्रंथ के अपमान के लिए माफी मांगने की मांग भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की टिप्पणियां जारी रहीं और माफी नहीं मांगी गई, तो हिंदुओं से कांग्रेस के बहिष्कार और उसे वोट नहीं देने की अपील को लेकर अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को धार्मिक ग्रंथों के अपमान की अनुमति नहीं दी जा सकती।

‘धर्मग्रंथ श्रद्धा का केंद्र, किसी को अपमान की अनुमति नहीं’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, देश का कोई व्यक्ति हो या दुनिया में कहीं का कोई व्यक्ति, धार्मिक ग्रंथों के प्रति अपमानजनक रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने धर्मग्रंथों को श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बताते हुए कहा कि उनके अर्थ को समझने के लिए धार्मिक परंपरा और संबंधित आचार्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने की थी मनुस्मृति की आलोचना

यह पूरा विवाद राहुल गांधी के हालिया पुणे दौरे से जुड़ा है। उन्होंने वहां आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इसी दौरान उन्होंने मनुस्मृति की आलोचना करते हुए अपने विचार रखे थे। राहुल गांधी की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में प्रतिक्रिया सामने आने लगी और अब संत समाज की ओर से भी इसका विरोध किया जा रहा है।

महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर शंकराचार्य ने रखी राय

शंकराचार्य ने अपने बयान में महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि केवल स्वतंत्रता की बात करने से महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि परिवार में बच्ची, पत्नी या बुजुर्ग महिला की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी को भी गंभीरता से समझना चाहिए।

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परिवार में महिलाओं की सुरक्षा को बताया अहम जिम्मेदारी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि किसी नवजात बच्ची को उसके हाल पर छोड़कर स्वतंत्र नहीं किया जा सकता। इसी तरह उनका तर्क था कि विवाह के बाद भी परिवार के सदस्यों की एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारियां बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की स्वतंत्रता के साथ उनकी सुरक्षा और सम्मान का सवाल भी महत्वपूर्ण है।

मनुस्मृति में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संदर्भ का जिक्र

शंकराचार्य ने मनुस्मृति से जुड़े अपने दृष्टिकोण को रखते हुए कहा कि यदि किसी ग्रंथ में महिलाओं की सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारी की बात कही गई है, तो उसे केवल एक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से माता की देखभाल और उसके भरण-पोषण की जिम्मेदारी को लेकर दिए गए संदर्भ का उल्लेख किया और इसे पारिवारिक दायित्व से जोड़ा।

राजनीतिक बयान से बढ़ा धार्मिक और वैचारिक विवाद

राहुल गांधी की मनुस्मृति संबंधी टिप्पणी ने एक बार फिर धर्म, सामाजिक व्यवस्था और महिलाओं की स्वतंत्रता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बहस तेज कर दी है। एक ओर राहुल गांधी की ओर से मनुस्मृति को लेकर आलोचनात्मक दृष्टिकोण सामने आया है, वहीं शंकराचार्य ने इसे धर्मग्रंथ के प्रति अपमानजनक रवैया बताते हुए विरोध किया है।

विवाद के राजनीतिक असर पर भी टिकी नजर

शंकराचार्य की ओर से कांग्रेस के बहिष्कार की मुहिम शुरू करने की चेतावनी के बाद इस विवाद का राजनीतिक असर भी चर्चा में आ गया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर बहस जारी है।

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