Rahul Gandhi Defamation Case: सुप्रीम कोर्ट ने खत्म की आपराधिक कार्यवाही, यूपी सरकार की मंजूरी नहीं होने पर मिला राहत

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यूपी में दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने शुक्रवार को इस मामले को रद्द कर दिया. इस निजी क्रिमिनल शिकायत में कांग्रेस सांसद पर वीडी सावरकर को बदनाम करके सांप्रदायिक अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया था. दरअसल राहुल गांधी ने ट्रायल कोर्ट के उस समन आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें IPC की धारा 153-A (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 के तहत अपराधों के लिए ट्रायल का सामना करने को कहा गया था।  सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी

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Published On :

अगस्त 14, 2026

नई दिल्ली

कांग्रेस नेता राहुल गांधी को यूपी में दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने शुक्रवार को इस मामले को रद्द कर दिया. इस निजी क्रिमिनल शिकायत में कांग्रेस सांसद पर वीडी सावरकर को बदनाम करके सांप्रदायिक अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया था. दरअसल राहुल गांधी ने ट्रायल कोर्ट के उस समन आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें IPC की धारा 153-A (समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 के तहत अपराधों के लिए ट्रायल का सामना करने को कहा गया था। 

सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत
 इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा कार्यवाही को रद्द करने से इनकार करने के बाद राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. मामले पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने पूछा कि क्या राज्य सरकार ने केस चलाने की मंजूरी दी है. इस पर राज्य की तरफ से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने जवाब दिया कि नहीं कोई मंजूरी नहीं दी गई। 

समन जारी करने वाला आदेश रद्द करने की वजह 
दरअसल सीआरपीसी की धारा 196 के तहत, IPC की धारा 153A के तहत किसी भी अपराध के संज्ञान के लिए  राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी होती है. राहुल गांधी के वकील ने अदालत से अपील करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार की मंजूरी नहीं है तो समन जारी करने वाला आदेश रद्द किया जाए. उन्होंने कहा कि मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए वापस मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाए. केस चलाने को मंजूरी नहीं है तो वे इस मामले में जरूरी कदम उठाएंगे। 

'मंजूरी नहीं है तो मामला वहीं खत्म'
हालांकि, मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस दत्ता ने कहा कि मामले का संज्ञान लेने से पहले मंजूरी जरूरी है. अगर मंजूरी नहीं है तो मामला वहीं खत्म हो जाता है. इसके बाद बेंच ने मामला रद्द करने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि यूपी सरकार की तरफ से दाखिल हलफनामे में अपीलकर्ता-आरोपी पर केस चलाने के लिए मंजूरी का दिए जाने का कोई जिक्र नहीं है. इसीलिए मजिस्ट्रेट द्वारा पारित शिकायत और आदेश रद्द किए जाते हैं। 

'फिर ऐसा बर्ताव किया तो हम खुद संज्ञान लेंगे'
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने  पिछले साल छले साल मामले की कार्यवाही पर लगाते हुए राहुल गांधी की सावरकर पर की गईं टिप्पणियों पर मौखिक रूप से कड़ी नाराजगी जताई थी. अदालत ने पूछा था कि क्या आजादी की लड़ाई लड़ने वालों के साथ ऐसा ही बर्ताव किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि अगर राहुल गांधी ने भविष्य में ऐसी टिप्पणियां दोहराई तो उनके खिलाफ कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करेगा।