Rahul Gandhi : मानहानि मामले में राहुल गांधी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ कोर्ट कार्रवाई रद्द की

वीर सावरकर पर टिप्पणी से जुड़े लखनऊ मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत ने शिकायत और समन समेत मजिस्ट्रेट के आदेश रद्द कर दिए। फैसला जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं होने के आधार पर आया। अब सवाल है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

Rahul Gandhi

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 14, 2026

Rahul Gandhi : कांग्रेस नेता राहुल गांधी को वीर सावरकर को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने लखनऊ की निचली अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें जारी किए गए समन को भी रद्द कर दिया गया है। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत में आगे की कार्रवाई नहीं होगी।

जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं लेने की दलील बनी आधार

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान बताया गया कि राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। इसी कानूनी आधार को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने निचली अदालत की कार्यवाही और राहुल गांधी को जारी समन को रद्द करने का फैसला सुनाया। इस फैसले से कांग्रेस नेता को फिलहाल बड़ी कानूनी राहत मिली है।

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिया गया था बयान

यह पूरा मामला राहुल गांधी की वर्ष 2022 में निकाली गई भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र में दिए गए एक बयान से जुड़ा है। आरोप है कि यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके कथित बयान को लेकर राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ था और बाद में इसे अदालत तक ले जाया गया।

सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी पर हुआ विवाद

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में सावरकर को अंग्रेजों का नौकर बताया था। साथ ही उनके बारे में यह भी कहा गया कि वह अंग्रेजों से पेंशन लेते थे। शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया कि इस तरह की टिप्पणी से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। इसी आधार पर अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने लखनऊ की अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दाखिल की थी।

लखनऊ की अदालत ने जारी किया था समन

मामले की सुनवाई करते हुए लखनऊ की निचली अदालत ने प्रथम दृष्टया राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153A और 505 के तहत मामला बनता माना था। इसके बाद अदालत ने कांग्रेस नेता को पेश होने के लिए समन जारी किया था। इस कार्रवाई के खिलाफ राहुल गांधी ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

राहुल गांधी ने निचली अदालत की कार्यवाही और समन को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, वहां से उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए अप्रैल 2025 में निचली अदालत द्वारा जारी समन पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

जुलाई 2025 में भी जारी रही अंतरिम रोक

सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद जुलाई 2025 में भी निचली अदालत की कार्यवाही पर लगाई गई अंतरिम रोक को आगे बढ़ाया था। इस दौरान मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रही और पक्षों की ओर से अदालत के सामने अलग-अलग दलीलें रखी गईं। अब शीर्ष अदालत ने मामले में अंतिम रूप से निचली अदालत की कार्यवाही और समन को ही रद्द कर दिया है।

सरकारी मंजूरी के अभाव में मिली राहुल गांधी को राहत

सुनवाई के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण कानूनी पहलू में मुकदमा चलाने के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी का अभाव प्रमुख रहा। अदालत के सामने इसी आधार पर निचली अदालत की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार को स्वीकार करते हुए राहुल गांधी के खिलाफ लखनऊ की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी और समन भी रद्द कर दिया।

फैसले से राहुल गांधी को बड़ी कानूनी राहत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सावरकर को लेकर दिए गए कथित बयान से संबंधित यह आपराधिक मामला राहुल गांधी के लिए फिलहाल खत्म हो गया है। इस फैसले को कांग्रेस नेता के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है। मामला शुरू होने के बाद से ही यह राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में रहा था।

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