Israel-Iran War: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या ने वैश्विक राजनीति में एक नया उबाल पैदा कर दिया है। इस घटना पर दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेताओं—व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप—के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के विरोधाभासों को सतह पर ला दिया है। जहाँ रूस इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता रहा है, वहीं अमेरिका इसे न्याय की जीत मान रहा है। इस बीच, तेहरान में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
पुतिन की कड़ी निंदा: ‘घृणित हत्या और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस हमले पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। पुतिन ने अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या को एक ‘घृणित कृत्य’ करार देते हुए कहा कि यह हमला मानवीय नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के तमाम स्थापित मानकों का उल्लंघन करता है। गौरतलब है कि इस हमले में न केवल खामेनेई, बल्कि उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इज़रायल-अमेरिकी बमबारी में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू की भी जान चली गई है, जिसे रूस ने एक बड़ी मानवीय त्रासदी बताया है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा प्रहार: ‘क्रूर शासन का अंत और न्याय की जीत’
रूसी रुख के विपरीत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना को ‘न्याय’ के रूप में परिभाषित किया है। ट्रंप ने अपने बयान में खामेनेई को इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि खामेनेई और उनके “खूनी गुंडों” ने न केवल ईरानी जनता का दमन किया, बल्कि कई अमेरिकी नागरिकों और दुनिया भर के निर्दोष लोगों को भी चोट पहुँचाई। ट्रंप के अनुसार, यह हमला उन सभी पीड़ितों के लिए एक राहत और न्याय की खबर है जिन्हें ईरान के कट्टरपंथी शासन ने दशकों तक प्रताड़ित किया था।
नेतन्याहू की ईरानी जनता से अपील: ‘अत्याचार की जंजीरें तोड़ने का समय’
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस सैन्य सफलता के बाद एक बार फिर ईरान के नागरिकों को सीधे संबोधित किया। नेतन्याहू ने कहा कि इज़रायली सेना आने वाले समय में आतंकी शासन के हजारों ठिकानों को नष्ट करेगी। उन्होंने ईरानी लोगों से भावुक अपील करते हुए कहा कि यह पीढ़ी में एक बार आने वाला अवसर है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे लाखों की संख्या में सड़कों पर उतरें ताकि इस “आतंक के शासन” को हमेशा के लिए उखाड़ फेंका जा सके। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इज़रायल का लक्ष्य ईरानी जनता नहीं, बल्कि उन्हें दबाने वाला नेतृत्व है।
नए लीडर अलीरेज़ा अराफ़ी की नियुक्ति: कौन संभालेगा कमान?
खामेनेई की मृत्यु के बाद, ईरान ने प्रशासनिक शून्य को भरने के लिए अलीरेज़ा अराफ़ी को देश का नया अंतरिम नेता नियुक्त किया है। 1959 में जन्मे अराफ़ी एक वरिष्ठ शिया धर्मगुरु हैं और उन्हें शासन का व्यापक अनुभव है। वे वर्तमान में गार्जियन काउंसिल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स और बसिज के प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। इससे पहले वे अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष और कोम के इमाम के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। अराफ़ी की छवि एक कुशल संगठक की है, जो इस संकट के समय में देश को संभालने की कोशिश करेंगे।
अस्थायी परिषद और भविष्य की चुनौतियाँ
ईरान का शासन अब एक अस्थायी परिषद के हाथों में होगा, जिसमें नए नेता अलीरेज़ा अराफ़ी के साथ न्यायपालिका प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन शामिल होंगे। यह त्रिमूर्ति इज़रायल और अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच ईरान की आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति का संचालन करेगी। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अराफ़ी का नेतृत्व ईरान को एक नए मोड़ पर ले जा सकता है, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश के भीतर उठने वाले संभावित विरोध और अंतरराष्ट्रीय सैन्य दबाव से निपटने की होगी।










