Punjab News: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा के शपथ ग्रहण के बाद राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक तरफ जहाँ पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार इस नियुक्ति की प्रक्रिया पर लगातार गंभीर सवाल खड़े कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने हाल ही में एक तीखा बयान जारी करते हुए ‘आप’ सरकार के इन सभी विरोधों और आरोपों को पूरी तरह से अनावश्यक और निराधार करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका से जुड़े इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देने के बजाय राज्य सरकार को संवैधानिक मर्यादाओं और स्थापित प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।
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संवैधानिक प्रावधानों के तहत हुई है नियुक्ति प्रक्रिया
केवल सिंह ढिल्लों ने मीडिया के सामने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की बतौर मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति पूरी तरह से पारदर्शी, वैध और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह पूरी चयन और नियुक्ति प्रक्रिया देश के संविधान में निहित प्रावधानों और निर्धारित ‘मेमोरेंडम ऑफ प्रोसिजर’ (कार्यपद्धति के ज्ञापन) के दायरे में रहकर पूरी की गई है। भाजपा नेता के अनुसार, इस मामले में किसी भी प्रकार के अनधिकृत हस्तक्षेप या नियमों की अनदेखी का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता, बशर्ते इसे राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए।
समय पर जवाब न देने का आरोप और नियमों की स्थिति
नियुक्ति की समय-सारणी और प्रक्रिया को समझाते हुए केवल सिंह ढिल्लों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा विधिवत सिफारिश किए जाने के बाद, गत 10 अगस्त को पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य सरकारों से निर्धारित प्रक्रिया के तहत उनकी राय और टिप्पणियां मांगी गई थीं। इस प्रक्रिया में हरियाणा सरकार तथा दोनों राज्यों के राज्यपालों ने समय रहते अपनी औपचारिक सहमति दर्ज करा दी थी, लेकिन पंजाब सरकार की ओर से निर्धारित समयावधि के भीतर कोई भी आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया नहीं भेजी गई।
कानूनी और प्रशासनिक नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्थापित प्रावधानों के अनुसार यदि संबंधित राज्य सरकार तय समयसीमा के भीतर अपनी राय नहीं देती है, तो उसे मौन सहमति मान लिया जाता है। ऐसी स्थिति में जब कानूनी रूप से सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, तो अब इस नियुक्ति की संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल उठाना किसी भी प्रकार से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है।
फाइलों को लंबित रखने की प्रवृत्ति और संस्थाओं की गरिमा
केवल सिंह ढिल्लों ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासनिक फाइलों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को लंबे समय तक लंबित रखने की उनकी पुरानी प्रवृत्ति के कारण आज संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि न्यायपालिका जैसे गरिमामयी संस्थानों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की प्रशासनिक देरी या राजनीति करना संस्थाओं की कार्यप्रणाली के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान
अपने बयान के अंत में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इस बात पर विशेष बल दिया कि देश के संघीय ढांचे में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान द्वारा प्रदत्त प्रक्रियाओं का सम्मान करना हर निर्वाचित सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों द्वारा न्यायपालिका की नियुक्ति प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से चुनौती दिए जाने को निंदनीय बताया। केवल सिंह ढिल्लों ने सलाह दी कि पंजाब सरकार को अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक विवाद खड़े करने के बजाय देश के नियमों और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का पूर्ण पालन करना चाहिए।
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