Punjab News: सरकार के फैसले का असर, कश्मीरी परिवारों ने शादी के कार्ड बांटना किया बंद; जानें वजह

चंडीगढ़  पंजाब सरकार के एक फैसले से कश्मीरी लोगों की चिंता बढ़ गई है. यहां शादी-विवाहों के लिए पूरी तैयारी कर चुके लोगों ने अचानक इनविटेशन कार्ड तक बांटना बंद कर दिया है. दरअसल पंजाब में पशु ले जाने वाले वाहनों पर शुल्क बढ़ा दिया गया है, इससे कश्मीर में मटन की कमी हो गई है, जिससे लोग परेशान हैं, जबकि मटन कश्मीर में होने वाली शादियों में दिया जाने वाला प्रमुख भोजन है।  इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक श्रीनगर में ऐसे कई परिवार हैं जहां आने वाले हफ्तों में शादियां होनी हैं लेकिन कश्मीर में मटन की

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Published On :

जुलाई 5, 2026

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चंडीगढ़ 

पंजाब सरकार के एक फैसले से कश्मीरी लोगों की चिंता बढ़ गई है. यहां शादी-विवाहों के लिए पूरी तैयारी कर चुके लोगों ने अचानक इनविटेशन कार्ड तक बांटना बंद कर दिया है. दरअसल पंजाब में पशु ले जाने वाले वाहनों पर शुल्क बढ़ा दिया गया है, इससे कश्मीर में मटन की कमी हो गई है, जिससे लोग परेशान हैं, जबकि मटन कश्मीर में होने वाली शादियों में दिया जाने वाला प्रमुख भोजन है। 

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक श्रीनगर में ऐसे कई परिवार हैं जहां आने वाले हफ्तों में शादियां होनी हैं लेकिन कश्मीर में मटन की कमी हो गई है. लिहाजा कुछ लोगों ने शादी के कार्ड बांटना रोक दिया है और कुछ दिन के लिए शादियां पोस्टपोन कर दी हैं. यहां के लोग उम्मीद जता रहे हैं कि कुछ दिनों में मटन की सप्लाई ठीक रहे। 

बता दें कि कश्मीर में मटन की कमी की मुख्य वजह पंजाब में लगाया जा रहा अतिरिक्त शुल्क है. मटन व्यापारियों ने आरोप लगाया कि पंजाब सीमा पर भेड़ ले जाने वाले हर ट्रक से 25,000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं. इसका असर कीमतों पर भी पड़ा है. ऐसे में मटन 700 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 750 रुपये प्रति किलो हो गया है। 

एक-दो किलो पर देखें तो यह कोई बड़ा अंतर नहीं दिखाई देता है लेकिन शादियों में जहां 200-400 किलो मटन की जरूरत एक साथ होती है तो वहां यह कीमत कई हजार का अंतर डाल रही है. कई जगहों पर देखा जा रहा है कि मटन की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। 

यह समस्या ऐसे समय आई है जब कश्मीर में अप्रैल से अक्टूबर तक शादी का सीजन चलता है. इसका असर कश्मीरी पारंपरिक दावत वाजवान पर भी पड़ा है, जिसमें मटन का एक नहीं बल्कि कई व्यंजन शामिल होते हैं. अब इन व्यंजनों की संख्या कम हो रही है। 

बता दें कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने इस शुल्क को गैरकानूनी और मनमाना बताया है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले में पंजाब के सीएम भगवंत मान को पत्र लिखकर पशु ढोने वाले वाहनों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रखने की मांग की है. वहीं कश्मीर मटन डीलर्स एसोसिएशन के महासचिव मेहराज-उद-दीन गनी ने बताया कि भेड़ मंडियां लगातार नौ दिनों से बंद हैं. उन्होंने कहा कि शादी का मौसम है, लेकिन व्यापारी मजबूर हैं। 

कश्मीर में 90 फीसदी लोग मांसाहारी
बता दें कि कश्मीर का मुख्य भोजन ही मांस है. यहां लगभग 90 फीसदी लोग मांसाहारी हैं और यहां मटन की खपत देश में सबसे ज्यादा है. हर साल यहां 600 लाख किलो से ज्यादा मटन खाया जाता है. इसका आधे से ज्यादा हिस्सा हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से आने वाली भेड़ों से पूरा होता है। 

व्यापारियों के अनुसार सामान्य दिनों में रोज 40–50 ट्रक (करीब 8,000 भेड़) कश्मीर आते हैं. शादी के सीजन में यह संख्या 60–70 ट्रक (करीब 11,000 भेड़) तक पहुंच जाती है। 

पंजाब सरकार ने दिया जबाव
वहीं इस मुद्दे पर पंजाब सरकार का कहना है कि यह कोई नया टैक्स नहीं है, बल्कि पशु मंडी शुल्क है. अधिकारियों के मुताबिक कुछ व्यापारी नियमों का पालन किए बिना पशु बाहर ले जा रहे हैं, जिससे राजस्व का नुकसान हो रहा है। 

बढ़ रहा विवाद
जबकि जम्मू-कश्मीर के व्यापारी कहते हैं कि पंजाब सिर्फ रास्ते में पड़ने वाला राज्य (ट्रांजिट स्टेट) है, इसलिए वहां टैक्स नहीं लगना चाहिए. उनका कहना है कि पहले 5,000 रुपये लिए जाते थे, लेकिन अब कई बार 25,000 रुपये तक मांगे जा रहे हैं। 

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि ये वाहन सिर्फ हाईवे का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए इस तरह की वसूली का कोई औचित्य नहीं है। 

अब इस विवाद को सुलझाने के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों की जल्द बैठक होने की संभावना जताई जा रही है. बैठक के बाद पंजाब सरकार औपचारिक जवाब देगी। 

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