Punjab News: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के वास्ते एक बेहद व्यापक और सख्त कार्य योजना तैयार की है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य आसमान से लेकर जमीन तक पुख्ता निगरानी रखना और खेतों में आग लगने की घटनाओं पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई करना है। इस बार सरकार ने तकनीक और जमीनी अमले का बेहतरीन तालमेल बिठाते हुए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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आसमान से 125 ड्रोन रखेंगे पैनी नजर

राज्य में पराली जलाने की वारदातों को रोकने के लिए पहली बार 125 आधुनिक ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं। संगरूर, तरनतारन, मोगा, फिरोजपुर, मुक्तसर और मानसा के कुल 23 गांवों को विशेष ‘हॉटस्पॉट’ के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां पिछले वर्ष 2025 में दस से अधिक आग लगने के मामले सामने आए थे।
इन 23 चिह्नित हॉटस्पॉट गांवों में सुरक्षा और निगरानी के वास्ते एक-एक ड्रोन विशेष तौर पर तैनात रहेगा। इसके अलावा, जिन गांवों में 2025 के दौरान पांच से नौ मामले दर्ज किए गए थे, वहां हर तीन गांवों पर एक ड्रोन की निगरानी होगी। शेष ड्रोन जरूरत के मुताबिक अन्य संवेदनशील जिलों में सक्रिय रहेंगे। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, ये ड्रोन मुख्य रूप से दोपहर 3:00 बजे से रात 9:00 बजे के बीच आकाश में गश्त करेंगे, क्योंकि इसी समयावधि में असावधानी या देर शाम के समय पराली जलाने की घटनाएं अधिक होती हैं।
12,000 नोडल अधिकारी और प्रोटेक्शन फोर्स मैदान में
ड्रोन तकनीक के साथ-साथ प्रशासनिक और मैदानी मोर्चे पर भी भारी फौज उतार दी गई है। स्थिति पर काबू पाने के लिए 12,000 नोडल अधिकारियों के साथ-साथ 1,200 सदस्यीय पराली प्रोटेक्शन फोर्स को सीधे तौर पर मैदान में उतारा गया है, जो किसी भी घटना की सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचेगी।
प्रबंधन के लिए नए कस्टम हायरिंग सेंटर और लक्ष्य
वर्ष 2026 में राज्य में धान का कुल रकबा लगभग 30 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जिससे करीब 188.1 लाख टन पराली का उत्पादन होने की संभावना है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 5.1 लाख टन कम है। इस वर्ष इन-सिटू (खेत के अंदर ही) प्रबंधन का लक्ष्य 101.5 लाख टन और एक्स-सिटू (खेत से बाहर ले जाकर) प्रबंधन का लक्ष्य 78 लाख टन निर्धारित किया गया है। किसानों को राहत देने के लिए सरकार इस साल 15,000 अतिरिक्त सीआरएम यूनिट उपलब्ध कराएगी और 500 नए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। हॉटस्पॉट क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए मशीनों की डिजिटल मैपिंग भी की जा रही है।
एक्स-सिटू प्रबंधन और लंबी अवधि की किस्मों पर रोक

पराली के स्थायी समाधान के लिए एक्स-सिटू प्रबंधन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। औद्योगिक बॉयलरों में लगभग 45 लाख टन पराली की खपत का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में पहले से ही 74 औद्योगिक इकाइयां ईंधन के रूप में इसका उपयोग कर रही हैं। इसके साथ ही, पूसा-44 जैसी लंबी अवधि वाली धान की किस्मों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है और पीआर-126 जैसी कम अवधि वाली किस्मों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। विविधीकरण योजना के तहत 1.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को मक्का, कपास और गन्ने की खेती की तरफ मोड़ने की पुख्ता योजना बनाई गई है ताकि पर्यावरण सुरक्षित रह सके।
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