सरकारी स्कूलों के लिए पंजाब सरकार का नया नियम शिक्षक और छात्र की गैरहाजिरी पर सीधा एक्शन

 चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। 1 अप्रैल से पंजाब के सरकारी स्कूलों में अनुपस्थिति को लेकर नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब यदि कोई छात्र या शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर रहता है, तो इसकी तुरंत जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी। छात्रों की अनुपस्थिति पर सीधा संपर्क नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है, तो उसकी डिटेल माता-पिता को भेजी जाएगी। यदि कोई छात्र लगातार 2 से 3 दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो स्कूल प्रशासन सीधे

Wrriten By :

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Published On :

मार्च 30, 2026

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 चंडीगढ़
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिक्षा विभाग की उपलब्धियों को साझा करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। 1 अप्रैल से पंजाब के सरकारी स्कूलों में अनुपस्थिति को लेकर नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब यदि कोई छात्र या शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर रहता है, तो इसकी तुरंत जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी।

छात्रों की अनुपस्थिति पर सीधा संपर्क
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई बच्चा स्कूल नहीं आता है, तो उसकी डिटेल माता-पिता को भेजी जाएगी। यदि कोई छात्र लगातार 2 से 3 दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है, तो स्कूल प्रशासन सीधे अभिभावकों से फोन पर संपर्क करेगा और अनुपस्थिति का कारण पूछेगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना और ड्रॉप-आउट रेट को कम करना है।

शिक्षकों पर भी रहेगी नज़र
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहेगी यदि कोई शिक्षक स्कूल से गैर-हाजिर होता है, तो इसकी सूचना उनके वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के माता-पिता को भी दी जाएगी। शिक्षक की लंबी अनुपस्थिति की स्थिति में स्कूल मैनेजमेंट कमेटी को सूचित किया जाएगा और उनकी जगह तुरंत दूसरे शिक्षक की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि बच्चों का सिलेबस पीछे न रहे।

भारत की पढ़ाई बनाम इंडिया की पढ़ाई
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम मान ने शिक्षा के दोहरे स्तर पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में दो तरह की शिक्षा है-एक ‘इंडिया’ की शिक्षा (महंगे प्राइवेट स्कूल) और दूसरी भारत की शिक्षा (सरकारी स्कूल)।

सीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि पहले सरकारी स्कूलों को केवल दलिया खाने वाले स्कूल बना दिया गया था, जहाँ शिक्षा से ज्यादा अन्य चीजों पर ध्यान था। मान सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों के बराबर लाकर खड़ा करना है, ताकि गरीब का बच्चा भी वही क्वालिटी एजुकेशन पा सके जो अमीर के बच्चों को मिलती है।

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