Pune Rape Murder Case : पुणे रेप-मर्डर केस में 59 दिन में फैसला, 4 साल की बच्ची के दरिंदे को मिला फांसी की सजा

पुणे रेप-मर्डर मामले में अदालत ने 59 दिनों के भीतर फैसला सुनाते हुए दोषी को फांसी की सजा दी। यह मामला तेज सुनवाई और गंभीर अपराध के कारण चर्चा में रहा। अदालत ने किन आधारों पर फैसला सुनाया, जांच में क्या सामने आया और आगे कानूनी प्रक्रिया क्या होगी, जानिए पूरी रिपोर्ट।

Pune Rape Murder Case

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जून 29, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Pune Rape Murder Case :  पुणे के नसरापुर गांव में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दिल दहला देने वाली दरिंदगी और हत्या के मामले में पुणे की विशेष अदालत ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए दोषी भीमराव प्रभाकर कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला न्याय प्रणाली की गति का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ जघन्य अपराध के महज 59 दिनों के भीतर दोषी को उसके अंजाम तक पहुँचाया गया। 65 वर्षीय भीमराव कांबले ने 1 मई को बच्ची को लालच देकर अपहरण किया और फिर बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थीं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) एस. आर. सालुंखे की अदालत ने POCSO अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोपी को दोषी मानते हुए उसे मृत्युदंड दिया।

बछड़ा दिखाने का झांसा और क्रूरता का 39 मिनट का काला अध्याय

घटना 1 मई की शाम करीब 3 से 4 बजे के बीच की है। आरोपी कांबले ने मासूम बच्ची को खाने की चीजें और मवेशी का बच्चा (बछड़ा) दिखाने का प्रलोभन दिया और उसे बहला-फुसलाकर एक पशु शेड में ले गया। वहाँ उसने 39 मिनट तक बच्ची के साथ अमानवीय दरिंदगी की। जब बच्ची ने विरोध किया, तो उसने उसका मुंह दबाया और छाती पर घातक चोटें पहुँचाकर उसकी हत्या कर दी। विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने अदालत में बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर चोट के 18 गंभीर निशान मिले थे, जो आरोपी की हैवानियत की पुष्टि करते थे। अदालत ने आरोपी के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया कि बच्ची फिसलकर गिरने से घायल हुई थी।

वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों ने आरोपी को घेरा

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने न्याय की जीत सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों का सहारा लिया। अदालत में सीसीटीवी फुटेज, डीएनए प्रोफाइलिंग, मेडिकल रिपोर्ट और आरोपी के मानसिक स्थिति (साउंडनेस) परीक्षण को ठोस सबूत के रूप में पेश किया गया। इसके अलावा, जिन बच्चों ने आरोपी को बच्ची को ले जाते हुए देखा था, उन्होंने पहचान परेड (टीआईपी) के दौरान भी उसकी शिनाख्त की। अभियोजन पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के 12 ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए इसे ‘रेयर ऑफ द रेयरेस्ट’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला बताया। आरोपी का पिछला रिकॉर्ड भी बेहद खौफनाक रहा है; उस पर पूर्व में भी एक 62 वर्षीय महिला और एक 17 वर्षीय किशोरी के साथ दुर्व्यवहार के मामले दर्ज थे।

न्याय की जीत: समाज के लिए एक कड़ा संदेश

पुणे की अदालत का यह फैसला समाज में व्याप्त ऐसे अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो मासूमों को अपना शिकार बनाते हैं। 137 पन्नों के अंतिम निर्णय में न्यायाधीश ने प्रत्येक पहलू पर गंभीरता से विचार किया। विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने कहा कि पीड़िता की कम उम्र और हमले की क्रूरता को देखते हुए फांसी की सजा ही एकमात्र उचित विकल्प था। साक्ष्यों के जाल में फंसा 65 वर्षीय कांबले अपने किए पर पर्दा डालने की लाख कोशिशों के बावजूद बच नहीं सका। यह फैसला न केवल उस मासूम बच्ची को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्षता और त्वरित कार्रवाई के प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ाता है।

Read More  : Ram Mandir Scam : चंपत राय और अनिल मिश्रा को अयोध्या छोड़ने की चेतावनी, तीन दिन का अल्टीमेटम जारी

2