Pune Porsche Case: पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस ने एक बार फिर अदालत और आम जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन आरोपियों को जमानत दे दी है, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ। इस मामले में मई 2024 में एक नाबालिग द्वारा गाड़ी चलाने की लापरवाही से दो लोगों की मौत हो गई थी। आरोपियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने खून के सैंपल बदलकर नाबालिग के परिवार की मदद की थी।
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कोर्ट का फैसला और जमानत की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां शामिल हैं, ने कहा कि आरोपियों को ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किया जाए। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जमानत का फायदा लेने वाले आरोपियों को किसी भी तरह की आज़ादी का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो जमानत रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने माता-पिता को भी चेतावनी दी कि बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह से उनके कंधों पर है और नाबालिगों को तेज़ रफ़्तार गाड़ी देने या शराब-नशे के लिए पैसे देने जैसी हरकतें अस्वीकार्य हैं।
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माता-पिता को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
कोर्ट ने माता-पिता के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पर कड़ा ऐतराज जताया। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि जश्न मनाने के लिए नशीले पदार्थों और तेज़ रफ़्तार गाड़ी चलाने पर आधारित नहीं होना चाहिए। इस लापरवाही के कारण दो निर्दोष लोगों की जान चली गई। कोर्ट ने यह भी कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के साथ पर्याप्त समय नहीं बिताते और उन्हें केवल ATM कार्ड और मोबाइल फ़ोन देकर छोड़ देते हैं। न्यायालय ने कहा कि कानून और परिवार दोनों को मिलकर बच्चों की जिम्मेदारी निभानी होगी ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
पुणे पोर्श केस की घटनाएं
इस मामले की पृष्ठभूमि 19 मई 2024 की है। पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक नाबालिग लड़के ने कथित रूप से नशे की हालत में पोर्श कार चलाते हुए मोटरसाइकिल पर सवार एक महिला और एक अन्य व्यक्ति को टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में दोनों की मौत हो गई। अदालत में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ ने बिचौलिए के रूप में काम करते हुए अस्पताल में एक चिकित्सक के सहायक को 3 लाख रुपये दिए थे ताकि नाबालिग आरोपी के रक्त सैंपल को बदला जा सके। इस तरह आरोपियों पर सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप भी था।
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