Pune Illicit Iiquor Case: मुनाफे के लालच ने ली 18 जानें! महाराष्ट्र में जहरीली शराब कांड का खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी योगेश वानखेड़े ने ज्यादा मुनाफे के लालच में शराब में मेथनॉल मिलाकर बेचा। इस जहरीली मिलावट के कारण लोगों की हालत बिगड़ी और 18 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

Pune Illicit Iiquor Case

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 30, 2026

Pune Illicit Iiquor Case: महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ जहरीली शराब (Hooch) पीने के कारण मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 18 हो चुका है। वहीं, फुगेवाड़ी इलाके में अभी भी 6 लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाले मामले में पिंपरी-चिंचवाड़ के फुगेवाड़ी-दापोड़ी क्षेत्र में 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि पुणे के हडपसर इलाके में 6 लोगों ने दम तोड़ा है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए इस पूरे गोरखधंधे के मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

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मुनाफे का जानलेवा खेल

पुलिस द्वारा की गई शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े केवल अपना मुनाफा बढ़ाना चाहता था और इसी लालच में उसने लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया। योगेश वानखेड़े, राधेश्याम प्रजापति नाम के एक सप्लायर से ₹1900 प्रति 35 लीटर कैन के हिसाब से अवैध शराब खरीदता था। इसके बाद वह इस शराब को पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ की विभिन्न अवैध दुकानों व ठिकानों पर ₹2700 प्रति कैन के भाव से बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा था।

मेथनॉल की जानलेवा मिलावट

इस कमाई से भी जब आरोपी का मन नहीं भरा, तो उसने शराब की मात्रा बढ़ाने के लिए एक खतरनाक तरकीब निकाली। उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए ‘मेथनॉल’ (एक अत्यधिक जहरीला केमिकल) मंगवाया और उसे शराब में मिलाना शुरू कर दिया। मेथनॉल मिलते ही शराब की क्वांटिटी (मात्रा) तो बढ़ गई, लेकिन वह आम लोगों के लिए सीधे तौर पर धीमा जहर (पॉइजन) बन गई, जिसने देखते ही देखते 18 घरों के चिराग बुझा दिए।

आरोपी का पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड

पकड़ा गया मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े कोई नौसिखिया नहीं है, बल्कि वह अवैध शराब की तस्करी का पुराना खिलाड़ी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह पहले भी अवैध शराब बेचने और इसके काले कारोबार के मामले में जेल की हवा खा चुका है। उसके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल, पुलिस और राज्य आबकारी विभाग (Excise Department) की संयुक्त टीमें योगेश वानखेड़े के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं ताकि इस धंधे से जुड़े अन्य चेहरों को भी बेनकाब किया जा सके।

सीएम देवेंद्र फडणवीस सख्त

इस गंभीर प्रशासनिक चूक और बड़ी त्रासदी पर संज्ञान लेते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद पुलिसिया कार्रवाई में तेजी तो आई है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

जनता और विपक्ष यह सवाल उठा रहे हैं कि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ जैसे विकसित शहरों में पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे इतना बड़ा जानलेवा नेटवर्क कैसे फल-फूल रहा था? इस लापरवाही पर फिलहाल कोई भी बड़ा अधिकारी सीधे तौर पर जवाब देने से बच रहा है। इस बीच, आबकारी विभाग के अधिकारियों ने नागरिकों से एक बार फिर अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत जगह से शराब न खरीदें और केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त व अधिकृत दुकानों से ही खरीदारी करें।

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