बुरहानपुर में मिला 220 वर्ष पुराना अनमोल खजाना, दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि की आज भी होती है पूजा

भोपाल  बुरहानपुर निवासी आदित्य हरिकृष्ण शर्मा के पास से 220 वर्ष पुरानी टीका मिली है। विक्रम संवत 1862 (1805–1806 ईस्वी ) की हस्तलिखित यह टीका कागज पर अंकित है। यह संस्कृत व्याकरण और सुलेखन की दृष्टि से अद्वितीय है। एकरूपी लेखनबद्धता एवं शब्दों की व्यवस्थित लिखावट से प्रतीत होता है कि यह किसी प्रशिक्षित विद्वान लेखक द्वारा लिखी गई थी। राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों संग्रह मध्य प्रदेश के पुरातत्व आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रारंभ किए गए ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत सर्वेक्षण और संग्रहण कार्य के अंतर्गत यह टीका

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Published On :

जुलाई 11, 2026

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भोपाल
 बुरहानपुर निवासी आदित्य हरिकृष्ण शर्मा के पास से 220 वर्ष पुरानी टीका मिली है। विक्रम संवत 1862 (1805–1806 ईस्वी ) की हस्तलिखित यह टीका कागज पर अंकित है। यह संस्कृत व्याकरण और सुलेखन की दृष्टि से अद्वितीय है।

एकरूपी लेखनबद्धता एवं शब्दों की व्यवस्थित लिखावट से प्रतीत होता है कि यह किसी प्रशिक्षित विद्वान लेखक द्वारा लिखी गई थी।

राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों संग्रह
मध्य प्रदेश के पुरातत्व आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रारंभ किए गए ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत सर्वेक्षण और संग्रहण कार्य के अंतर्गत यह टीका मिली है।

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उन्होंने बताया कि इस पांडुलिपि के भाषा विन्यास एवं लिपि शैली से इस पर राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों का संयुक्त प्रभाव दिखाई देता है।

पूर्वजों से प्राप्त हुआ ग्रंथ
संग्रहकर्ता परिवार के लोगों ने बताया कि यह ग्रंथ उन्हें उनकी परदादी स्वर्गीय देवकी बाई से प्राप्त हुआ था। यह परिवार आज भी इस हस्तलिखित पवित्र धार्मिक ग्रंथ को नित्य पूजन एवं भोग लगाते हैं।

 

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