राष्ट्रपति मुर्मू ने दिया विकसित भारत का मंत्र, जनजातीय महासम्मेलन में सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

बैतूल  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार करती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। राष्ट्रपति बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन का शुभारंभ करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सराहना की। राष्ट्रगीत के

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Published On :

जून 18, 2026

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बैतूल 
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के बैतूल में आयोजित ब्रह्मकुमारीज संस्थान के महासम्मेलन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण की यात्रा अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक शिक्षा व्यक्ति के जीवन में शांति, संतुलन और नई आशा का संचार करती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।

राष्ट्रपति बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन का शुभारंभ करने पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों की सराहना की।

राष्ट्रगीत के साथ शुरुआत, दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारंभ स्टेडियम में मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ की गई। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया। मंच पर उन्हें मोमेंटो भेंट कर उनका सम्मान किया गया।इस अवसर पर कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसके बाद महासम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई।

राष्ट्रपति बोलीं- जनजातीय समाज ने परंपरा काे संभालकर रखा उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है। उनके जीवन में संवेदना, सहयोग, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की गहरी जड़ें हैं, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी समुदाय का प्रकृति के प्रति जुड़ाव और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण का दृष्टिकोण आज के समय में पूरे समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

बोलीं- राष्ट्र निर्माण में सबकी भूमिका अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी को याद करते हुए उनके प्रसिद्ध कथन “भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश का हर हिस्सा भारत की आत्मा का अभिन्न अंग है और राष्ट्र निर्माण में सभी समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है।

राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि यह महासम्मेलन जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और आध्यात्मिक जागरूकता को नई दिशा देगा। साथ ही उन्होंने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए सभी से मिलकर काम करने की अपील की।

मंच पर मौजूद रहे राज्यपाल और विशिष्ट अतिथि इस विशाल महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। मंच पर उनके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके, प्रदेश के राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और संस्था के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल मौजूद रहे।

साथ ही, माउंट आबू से आईं लीना बहन और शैलजा बहन सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

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