Prayagraj News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुंभ मेला भगदड़ के एक पीड़ित व्यक्ति के मुआवजे के भुगतान में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य जांच आयोग और मेला प्राधिकरण को आदेश दिया है कि मृतक महिला के पति द्वारा किए गए मुआवजे के दावे को 30 दिनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाए। यह महिला 29 जनवरी, 2025 को तड़के हुई भगदड़ में कुचलकर मृत्यु हुई थी।
उदय प्रताप सिंह द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अगर यह आदेश लागू नहीं हुआ, तो अदालत इस मामले में गंभीर कदम उठाने को बाध्य होगी। अदालत ने मेला प्राधिकरण और जांच आयोग को चेतावनी दी कि पीड़ितों के मुआवजे में और विलंब स्वीकार्य नहीं होगा।
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भगदड़ की पृष्ठभूमि और राज्य सरकार की दलील

29 जनवरी, 2025 को मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम नोज के पास हुई भगदड़ में कथित रूप से 30 से 39 लोग मारे गए थे। इस मामले में पिछले वर्ष 6 जून, 2025 को सुनवाई के दौरान एक अवकाश पीठ ने प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी, क्योंकि भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने में विलंब हो रहा था। 8 जनवरी, 2026 को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि जांच आयोग ने 17 दिसंबर, 2025 को याचिकाकर्ता का बयान दर्ज कर लिया है और भगदड़ में हुई मृत्यु के मामलों की समीक्षा मेला प्राधिकरण के साथ समन्वय में की जा रही है। राज्य सरकार ने कहा कि व्यापक जनहित के तहत जांच आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया है, क्योंकि कई पीड़ित और उनके आश्रित देरी से आयोग से संपर्क कर रहे हैं और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
अदालत ने मुआवजे में विलंब अस्वीकार्य बताया
अदालत ने कहा कि छह जून, 2025 को दिए गए आदेश के बावजूद, अधिकारियों ने अभी तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अब याचिकाकर्ता के मुआवजे के दावे का मुद्दा जल्द से जल्द निपटाया जाना चाहिए। अदालत ने आयोग और मेला प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वे 30 दिनों के भीतर निर्णय लें और अगली सुनवाई तक इसकी सूचना अदालत को दें।
अदालत ने 8 जनवरी के अपने आदेश में चेतावनी दी कि अगर अनुपालन हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो अदालत इस मामले में गंभीर रुख अपनाने को बाध्य होगी। सुनवाई की अगली तारीख 18 फरवरी, 2026 तय की गई है।









