Prayagraj Magh Mela 2026: प्रशासन ने ‘अमृत स्नान’ की खबरों पर लगाया विराम, परंपरा से छेड़छाड़ की अटकलें खारिज

प्रयागराज माघ मेला 2026 को लेकर प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। इस बार मेले में अमृत स्नान की अनुमति नहीं होगी।

Prayagraj Magh Mela 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 13, 2026

Prayagraj Magh Mela 2026: प्रयागराज में संगम तट पर आयोजित होने वाले माघ मेले 2026 को लेकर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस बार मेले में अमृत स्नान की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि माघ मेला अपनी पारंपरिक परंपराओं के अनुसार ही आयोजित होगा और इसमें किसी भी नई परंपरा को शामिल नहीं किया जाएगा। अमृत स्नान केवल कुंभ और महाकुंभ मेले से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे माघ मेले में लागू करना उचित नहीं माना गया।

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साधु-संतों की तैयारी और प्रशासन की प्रतिक्रिया

Prayagraj Magh Mela 2026
प्रशासन ने ‘अमृत स्नान’ की खबरों पर लगाया विराम

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को जानकारी मिली थी कि कुछ साधु-संत मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के अवसर पर अमृत स्नान की तैयारी कर रहे हैं। इस सूचना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए तुरंत निर्णय लिया। अधिकारियों का मानना है कि अमृत स्नान के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित होते हैं, जिससे अव्यवस्था और हादसों की संभावना बढ़ जाती है। कुंभ मेले में अमृत स्नान के लिए विशेष सुरक्षा और व्यवस्थाएं की जाती हैं, जबकि माघ मेले में ऐसे इंतजाम नहीं होते।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि

मेला अधिकारी ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। इसी कारण अमृत स्नान की अनुमति न देने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि परंपरा से छेड़छाड़ नहीं की जाएगी और माघ मेला उसी स्वरूप में आयोजित होगा, जैसा वर्षों से होता आया है।

पौष पूर्णिमा से माघ मेले की शुरुआत

उल्लेखनीय है कि 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन संगम की रेती पर माघ मेले की शुरुआत हो चुकी है। इसी के साथ एक माह तक चलने वाला कल्पवास भी आरंभ हो गया है। सुबह से ही बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा श्रद्धालु गंगा और संगम में स्नान के लिए पहुंचने लगे।

कल्पवास की परंपरा

त्रिवेणी संगम आरती सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र मिश्र ने बताया कि इस वर्ष लगभग पांच लाख श्रद्धालु कल्पवास करेंगे। कल्पवासी दिन में दो बार गंगा स्नान करते हैं, सादा और सीमित भोजन करते हैं तथा शेष समय पूजा-पाठ और साधना में व्यतीत करते हैं। यह परंपरा माघ मेले की विशेष पहचान है और श्रद्धालु इसे पूरी निष्ठा से निभाते हैं।

ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़

पौष पूर्णिमा के दिन कड़ाके की ठंड के कारण सुबह के समय स्नान करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। लेकिन जैसे ही धूप निकली, श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई। मेला प्रशासन के अनुसार, सुबह 10 बजे तक करीब नौ लाख लोगों ने गंगा और संगम में आस्था की डुबकी लगाई।

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