Pratik Jain I-PAC: कौन हैं प्रतीक जैन? IIT बॉम्बे से तृणमूल के ‘चाणक्य’ बनने तक का पूरा सफर

प्रशांत किशोर के पीछे हटने के बाद कौन संभाल रहा है देश की सबसे बड़ी चुनावी मशीनरी? क्या आप जानते हैं कि IIT बॉम्बे से पास आउट एक इंजीनियर अब ममता बनर्जी का 'चाणक्य' बन चुका है? प्रतीक जैन ने कैसे पर्दे के पीछे रहकर बंगाल चुनाव की तस्वीर बदली? जानिए उनकी शिक्षा, करियर और I-PAC के सर्वेसर्वा बनने का पूरा रोमांचक सफर!

Pratik Jain I-PAC

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 8, 2026

Pratik Jain I-PAC:  राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रतीक जैन का नाम चर्चित रहा है। उन्हें अक्सर ‘मेघनाद’ की भूमिका निभाने वाला नेता कहा जाता है। तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति बनाने से लेकर संगठनात्मक निर्णयों तक, उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। हालांकि, अब तक उनका काम ज्यादातर पर्दे के पीछे होता था। लेकिन गुरुवार को ममता बनर्जी और ईडी के बीच खींचतान ने उन्हें अचानक राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया।

IIT बॉम्बे से पॉलिटिकल स्ट्रेटेजिस्ट तक की यात्रा

झारखंड के मूल निवासी प्रतीक जैन ने IIT बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग और मैटेरियल साइंस में बी.टेक किया। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने 2008 में IIT बॉम्बे में प्रवेश लिया और 2012 में अपनी पढ़ाई पूरी की। बी.टेक के बाद उन्होंने एक्सिस बैंक में कुछ समय के लिए इंटर्नशिप की और फिर डेलॉइट कंपनी में 15 महीने तक काम किया।

राजनीति में कदम और सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस

2013 में प्रतीक ने सिटिज़न्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस नामक संगठन की स्थापना की। मार्च 2015 तक उन्होंने इसमें सक्रिय योगदान दिया। गुजरात में काम करते हुए उनकी मुलाकात प्रशांत किशोर से हुई। इसके बाद उन्होंने अपने संगठन को और व्यापक रूप दिया और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।

I-PAC के को-फाउंडर और राज्य में रणनीतिक काम

प्रत्यक्ष रूप से, प्रतीक जैन I-PAC के को-फाउंडर हैं, जिनके साथी विनेश चंदेल और ऋषिराज सिंह हैं। 2015 से I-PAC अलग-अलग राज्यों में वोटर एक्सपर्ट के तौर पर सक्रिय है। बिहार, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में उनके रणनीतिक योगदान को सफल माना गया है। वर्तमान में भी प्रतीक बंगाल में तृणमूल के लिए कंसल्टेंट के रूप में काम कर रहे हैं।

ED की छापेमारी और आरोप

गुरुवार सुबह ED ने प्रतीक जैन के घर और साल्ट लेक स्थित ऑफिस पर छापेमारी की। एजेंसी का दावा है कि उन्हें I-PAC लीडर के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत मिले हैं। यह कार्रवाई तृणमूल की वोटिंग स्ट्रेटेजी के संबंध में जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से की गई मानी जा रही है।

ममता बनर्जी का बयान

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि प्रतीक जैन पार्टी के IT सेल के हेड हैं। उनका यह भी दावा है कि ED की छापेमारी का उद्देश्य उनके द्वारा तैयार की गई वोटिंग रणनीति की चोरी करना है। इस बयान ने राजनीतिक विवाद को और बढ़ा दिया है।

प्रतीक जैन की राजनीतिक छवि

राजनीति में प्रतीक का नाम अब तक रणनीतिकार और खिलाड़ी के रूप में जाना जाता था। उनकी विशेषज्ञता चुनावी रणनीति, संगठनात्मक निर्णय और वोटर एनालिसिस में मानी जाती है। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए उनका काम महत्वपूर्ण रहा है।

राजनीति और कानून की टकराहट

गुरुवार की छापेमारी ने प्रतीक जैन को सार्वजनिक और विवादित राजनीतिक घटनाओं के केंद्र में ला दिया है। यह मामला चुनावी रणनीति, भ्रष्टाचार और पार्टी के भीतर की राजनीतिक ताकतों के टकराव का उदाहरण बन गया है। प्रतीक जैन की भूमिका और भविष्य की कार्रवाई राज्य की राजनीति में बड़े प्रभाव डाल सकती है।

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