UP Politics: मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव से अलग होंगे प्रतीक? BJP नेता पर लगाया ‘फेमस’ होने का आरोप।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव और भाजपा नेता अपर्णा यादव के बीच तलाक की खबरों ने यूपी की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। प्रतीक ने इंस्टाग्राम पर अपर्णा को 'स्वार्थी' और 'परिवार तोड़ने वाली' बताते हुए अलग होने का ऐलान किया। टिकट की राजनीति से लेकर पारिवारिक कलह तक, जानें इस हाई-प्रोफाइल विवाद की पूरी कहानी।

UP Politics

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 20, 2026

UP Politics: उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी और भाजपा नेता अपर्णा यादव से अलग होने के संकेत दिए। सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट साझा करते हुए प्रतीक ने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे न केवल पारिवारिक बल्कि राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं।

Weather Update: ठंड के बाद बारिश का संकट, यूपी-राजस्थान समेत 9 राज्यों में अलर्ट

प्रतीक यादव का सोशल मीडिया पोस्ट

आपको बता दे कि, प्रतीक यादव ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने अपर्णा यादव को “स्वार्थी” करार दिया। उन्होंने लिखा कि अपर्णा केवल प्रसिद्धि की भूखी हैं और अपने निजी हितों के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। इस पोस्ट के बाद से ही दोनों के वैवाहिक संबंधों में दरार और तलाक की खबरें जंगल में आग की तरह फैल गई हैं। हालांकि, अभी तक इस पर आधिकारिक कानूनी पुष्टि का इंतजार है, लेकिन प्रतीक के कड़े तेवरों ने राजनीतिक गलियारों को चर्चा का विषय दे दिया है।

2022 विधानसभा चुनाव और अपर्णा का भाजपा में प्रवेश

आपको बता दे कि, अपर्णा यादव ने साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी कुनबे को छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। उस समय कयास लगाए जा रहे थे कि भाजपा उन्हें लखनऊ की किसी महत्वपूर्ण सीट से चुनावी मैदान में उतारेगी। हालांकि, पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। टिकट न मिलने के बावजूद अपर्णा ने खुद को भाजपा का “अनुशासित सिपाही” बताया और पार्टी के लिए प्रचार जारी रखा, लेकिन पर्दे के पीछे उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं स्पष्ट दिखने लगी थीं।

लोकसभा 2024 के लिए राजनीतिक घेराबंदी

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद खाली हुई मैनपुरी सीट हो या 2024 का लोकसभा चुनाव, अपर्णा यादव ने हर बार टिकट के लिए सक्रियता दिखाई। खबरों की मानें तो उन्होंने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश की। कभी गोशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मेजबानी करना, तो कभी सपा के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी करना, अपर्णा ने हर दांव चला, लेकिन चुनावी मैदान में उतरने का उनका सपना हर बार अधूरा रह गया।

महिला आयोग में नियुक्ति और अपर्णा यादव की नाराजगी

लंबे इंतजार के बाद सितंबर 2024 में योगी सरकार ने अपर्णा को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष नियुक्त किया। लेकिन, एक कद्दावर नेता की छवि रखने वाली अपर्णा को यह छोटा पद रास नहीं आया। नाराजगी के चलते उन्होंने कई दिनों तक अपना कार्यभार नहीं संभाला, जिससे भाजपा के भीतर असहज स्थिति पैदा हो गई। राजनीतिक विश्लेषक इसे अपर्णा की “पद की लालसा” और पार्टी के प्रति उनके असंतोष के रूप में देखते हैं।

भाजपा सरकार के लिए बढ़ती मुश्किलें

हाल ही में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में हुए धर्मांतरण विवाद और हंगामे ने अपर्णा को फिर से विवादों के केंद्र में खड़ा कर दिया। बिना किसी पूर्व सूचना के समर्थकों के साथ वीसी कार्यालय में घुसने और यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ तीखी बहस ने सरकार की किरकिरी कराई। इस घटना ने साबित कर दिया कि अपर्णा यादव का कार्यशैली अक्सर भाजपा के अनुशासित ढांचे से मेल नहीं खाती, जो अब उनके निजी और राजनीतिक जीवन दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

Greater Noida: युवराज मेहता की मौत ने हिलाया लखनऊ; सीएम योगी के आदेश पर नपेंगे बड़े अफसर