Anti Reservation Protest: आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर प्रकाश आंबेडकर का बड़ा हमला

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को लेकर सियासत गरमा गई है। बहुजन आघाड़ी प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने प्रदर्शनकारियों पर सामाजिक न्याय और SC, ST, OBC के अधिकारों के खिलाफ होने का आरोप लगाया। उन्होंने बाबा साहेब के संविधान सभा भाषण का हवाला देते हुए जाति व्यवस्था, सामाजिक बंधुत्व और समानता का मुद्दा उठाया।

Anti Reservation Protest

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अगस्त 24, 2026

Anti Reservation Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने प्रदर्शन को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रदर्शन सामाजिक न्याय के खिलाफ है और तथाकथित उच्च जातियों के वर्चस्व को बनाए रखने की कोशिश को उजागर करता है।

आरक्षण विरोधी आंदोलन पर प्रकाश आंबेडकर ने उठाए सवाल

प्रकाश आंबेडकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जंतर-मंतर के आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रदर्शन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक न्याय के खिलाफ खड़े दिखाई देते हैं।

आंबेडकर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने जाति व्यवस्था की रक्षा के लिए अपनी कथित उच्च जाति की पहचान को खुलकर सामने रखा। उनके मुताबिक, यह केवल आरक्षण का विरोध नहीं बल्कि सामाजिक बराबरी और वंचित समुदायों के अधिकारों से जुड़े व्यापक सवालों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब किसी सामाजिक व्यवस्था में कुछ वर्ग अपने विशेषाधिकारों को बनाए रखने के लिए विरोध करते हैं, तो इससे सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े होते हैं।

प्रकाश आंबेडकर ने बाबा साहेब के संविधान सभा भाषण का किया जिक्र

आरक्षण विरोधी प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रकाश आंबेडकर ने बाबा साहेब डॉ. बीआर आंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा भाषण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने जाति व्यवस्था को सामाजिक एकता के लिए बड़ी चुनौती बताया था।

जाति व्यवस्था और सामाजिक एकता पर आंबेडकर की टिप्पणी

प्रकाश आंबेडकर के मुताबिक, जातियां सामाजिक जीवन को विभाजित करती हैं और अलगाव को मजबूत करती हैं। उन्होंने बाबा साहेब के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समुदायों के बीच लगातार दूरी, ईर्ष्या और द्वेष की स्थिति राष्ट्र की एकता को कमजोर कर सकती है। उन्होंने जंतर-मंतर के प्रदर्शन को इसी संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि खुले तौर पर जातिगत पहचान और राजनीतिक नारों के साथ विरोध करना सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला कदम है।

‘बंधुत्व के बिना समानता और स्वतंत्रता अधूरी’

प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि समानता और स्वतंत्रता को मजबूत करने के लिए सामाजिक बंधुत्व जरूरी है। उनके अनुसार, केवल संविधान में अधिकार लिखे होने से समाज में वास्तविक बराबरी स्थापित नहीं हो सकती, जब तक अलग-अलग समुदायों के बीच भाईचारे की भावना मजबूत न हो। उन्होंने कहा कि यदि समाज का कोई वर्ग वंचित और शोषित समुदायों की उन्नति को अपने वर्चस्व के लिए खतरे के रूप में देखने लगे, तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर होती है।

SC, ST और OBC के सामाजिक न्याय पर आंबेडकर ने उठाया मुद्दा

आंबेडकर ने कहा कि कोई भी समाज तब तक वास्तविक बंधुत्व का दावा नहीं कर सकता, जब तक SC, ST और OBC के लिए सामाजिक न्याय की नीतियों का विरोध जातिगत विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए किया जाता रहेगा।

आरक्षण व्यवस्था पर विरोध को लेकर लोकतंत्र का सवाल

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब कमजोर पड़ता है, जब वंचित समुदायों की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को किसी दूसरे वर्ग के वर्चस्व के खिलाफ चुनौती माना जाने लगे। उनके मुताबिक, सामाजिक न्याय की व्यवस्था का उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से पीछे रह गए वर्गों को अवसर और प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना है।उन्होंने दोहराया कि जब तक बंधुत्व सामाजिक जीवन की वास्तविकता नहीं बनता, तब तक समानता और स्वतंत्रता केवल सतही आदर्श बनकर रह सकते हैं।

प्रकाश आंबेडकर ने बीजेपी-RSS और कांग्रेस को भी घेरा

अपने सोशल मीडिया पोस्ट के अंत में प्रकाश आंबेडकर ने बीजेपी और आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन राजनीतिक रूप से RSS और BJP द्वारा संगठित किया गया था। हालांकि यह उनका राजनीतिक आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि इस बयान में नहीं की गई है। आंबेडकर ने कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के खिलाफ कथित तौर पर सवर्ण पहचान और वर्चस्व का इस्तेमाल खुले तौर पर होने के बावजूद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आना भी गंभीर है।

आरक्षण के मुद्दे पर बढ़ सकती है सियासी गर्मी

जंतर-मंतर के आरक्षण विरोधी प्रदर्शन को लेकर प्रकाश आंबेडकर के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। एक तरफ आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाने वाले प्रदर्शनकारी हैं, तो दूसरी तरफ सामाजिक न्याय और आरक्षण के समर्थन में खड़े राजनीतिक दल और संगठन हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में आरक्षण, जातिगत प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।