Assam Assembly Elections 2026: असम की राजनीति में आज उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और नागांव से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में हुए इस दलबदल ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
बीजेपी कुनबे में प्रद्युत का स्वागत
बताते चले कि, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने प्रद्युत बोरदोलोई के पार्टी में आने को एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि 1975 से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे एक अनुभवी नेता का भाजपा में आना यह दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर अब आत्मसम्मान के साथ काम करना असंभव हो गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बोरदोलोई के आने से नागांव और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व से उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव लड़ाने की सिफारिश करेगी।
कांग्रेस से 24 घंटे के भीतर नाता तोड़कर भगवा रंग में रंगे सांसद
आपको बता दे कि, प्रद्युत बोरदोलोई का कांग्रेस से मोहभंग काफी तेजी से हुआ। उन्होंने बीते दिन ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना संक्षिप्त इस्तीफा सौंपा था। इस्तीफे के महज 24 घंटे के भीतर उनका भाजपा में शामिल होना यह बताता है कि पर्दे के पीछे लंबे समय से इसकी पटकथा लिखी जा रही थी। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में असम भाजपा की कोर टीम ने बेहद सक्रिय भूमिका निभाई है। बोरदोलोई का जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ा संगठनात्मक और रणनीतिक नुकसान माना जा रहा है।
पूर्व उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार की भाजपा में एंट्री
कांग्रेस की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं। पार्टी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नवज्योति तालुकदार ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। दिल्ली में मीडिया से चर्चा करते हुए तालुकदार ने पुष्टि की कि वे गुवाहाटी पहुँचते ही औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता लेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से विस्तार में चर्चा हो चुकी है। तालुकदार का जाना असम कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी और नेतृत्व के प्रति असंतोष को उजागर करता है।
असम कांग्रेस में मची भगदड़
नवज्योति तालुकदार ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि प्रद्युत बोरदोलोई के बाद अब कांग्रेस के कई अन्य बड़े चेहरे भी भाजपा के संपर्क में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ‘हाथ’ का साथ छोड़कर ‘कमल’ थामने की यह प्रक्रिया अभी और तेज होगी। मुख्यमंत्री सरमा ने भी स्पष्ट कर दिया है कि उनका लक्ष्य और अधिक कांग्रेस नेताओं को भाजपा की विचारधारा से जोड़ना है। चुनाव से पहले नेताओं का यह पलायन असम कांग्रेस के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर सकता है।









