हरियाणा में नीति बदलाव: मिक्स्ड लैंड यूज को हरी झंडी, कर्मचारियों को भी मिला बड़ा लाभ

पंचकूला. हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभागीय विकास योजनाओं में मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्सड लैंड यूज) के लिए नई नीति को मंजूरी दी है। यह नीति उन क्षेत्रों में लागू होगी, जहां आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक/अर्द्ध-सार्वजनिक और औद्योगिक उपयोगों को एक साथ शामिल किया गया है, लेकिन पहले अनुमत उपयोग का प्रतिशत स्पष्ट नहीं था। मंत्रिमंडल ने इस नीति के माध्यम से लंबित परियोजनाओं और विभिन्न अनुमत उपयोगों के बीच स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में अब आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगों की अनुमति

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Published On :

मार्च 25, 2026

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पंचकूला.

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभागीय विकास योजनाओं में मिश्रित भूमि उपयोग (मिक्सड लैंड यूज) के लिए नई नीति को मंजूरी दी है। यह नीति उन क्षेत्रों में लागू होगी, जहां आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक/अर्द्ध-सार्वजनिक और औद्योगिक उपयोगों को एक साथ शामिल किया गया है, लेकिन पहले अनुमत उपयोग का प्रतिशत स्पष्ट नहीं था।

मंत्रिमंडल ने इस नीति के माध्यम से लंबित परियोजनाओं और विभिन्न अनुमत उपयोगों के बीच स्पष्टता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। मिश्रित भूमि उपयोग क्षेत्रों में अब आवासीय, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगों की अनुमति होगी, भले ही संबंधित सेक्टर/जोन में कोई प्रतिशत सीमा निर्धारित न हो। इसके अलावा, जहां पहले से औद्योगिक उपयोग अनुमत है, वहां इसका विस्तार भविष्य में केवल मौजूदा सीमा तक होगा। मौजूदा परिसर के भीतर छोटे विस्तार पर विचार किया जा सकता है। यदि कोई मालिक औद्योगिक उपयोग को अन्य संगत उपयोगों (आवासीय, वाणिज्यिक या संस्थागत) में बदलना चाहता है तो केवल लागू नीति और मानकों के अनुसार अनुमति दी जाएगी। मिश्रित भूमि परियोजनाओं में मुख्य उपयोग का न्यूनतम 70 प्रतिशत और सहायक उपयोग का अधिकतम 30 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। सहायक उपयोग को आवश्यकतानुसार 7.5 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

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अनुदान के लिए अब एक जैसा उपयोगिता प्रमाण पत्र
मंत्रिमंडल की बैठक में वित्तीय दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूजिंग आफ फंड्स के लिए मानक उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) का नया प्रारूप लागू करने को मंजूरी दी गई। अब सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाले सभी संस्थान, स्थानीय निकाय, बोर्ड, निगम और सहकारी समितियां यह सुनिश्चित करेंगी कि निधि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए ही हुआ है। पहले अलग-अलग संस्थाओं में प्रमाण पत्र के प्रारूप में भिन्नता होती थी, जिससे रिपोर्टिंग और जवाबदेही में चुनौती आती थी। नए मानकीकृत प्रारूप के तहत यह एकरूपता सुनिश्चित होगी। संशोधित नियमों के तहत अनुदान स्वीकृत या जारी करने वाले अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि सभी शर्तें पूरी हुई हैं।

कर्मचारियों के लिए लास्ट पे सर्टिफिकेट में सुधार
मंत्रिमंडल ने हरियाणा ट्रेजरी नियम, वाल्यूम-।। के नियम 4.176 के तहत लास्ट पे सर्टिफिकेट (एलपीसी) के नए प्रारूप को भी मंजूरी दी। एलपीसी का उपयोग मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण या सेवा समाप्ति के समय होता है और यह उनके वेतन, भत्ते, कटौती और ऋण की पूरी जानकारी देता है। नए प्रारूप में हाल के प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों के अनुरूप कई सुधार किए गए हैं। यूनिक कोड पेयी और प्राण नंबर शामिल किया गया है। सेवा की पूरी अवधि का सत्यापन अब एलपीसी में दर्ज होगा। इसमें कर्मचारी का पैन, मोबाइल नंबर, पे लेवल, बेसिक पे, अलाउंस विवरण दर्ज किया जाएगा।

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